नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि सरकार साल 2026 के अंत तक देश में ‘व्हीकल-टू-व्हीकल’ कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को अनिवार्य करने की योजना बना रही है। इस तकनीक की मदद से सड़क पर चलती गाड़ियां एक-दूसरे को सुरक्षा अलर्ट भेज सकेंगी, जिससे टक्कर और दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।
28 राज्यों के मंत्रियों ने दी मंजूरी
यह फैसला 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के परिवहन मंत्रियों की बैठक के बाद लिया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 50% तक कम किया जा सके।
ऑन-बोर्ड यूनिट से होगी गाड़ियों की बातचीत
गडकरी ने बताया कि इस टेक्नोलॉजी के लागू होने पर गाड़ियां आपस में वैसे ही बातचीत करेंगी जैसे हवाई पायलट अपनी उड़ानों के दौरान करते हैं। हर गाड़ी में एक ‘ऑन-बोर्ड यूनिट’ फिट की जाएगी, जो आसपास की गाड़ियों को अपनी लोकेशन, स्पीड, दिशा और ब्रेक लगाने जैसी जानकारी वायरलेस तकनीक के जरिए भेजेगी। इससे ड्राइवर को खतरा दिखने से पहले ही अलर्ट मिल जाएगा।
कम विजिबिलिटी में भी सुरक्षा सुनिश्चित
‘व्हीकल-टू-व्हीकल’ टेक्नोलॉजी उन हालात में सबसे अधिक कारगर होगी, जहां कैमरा या रडार काम नहीं कर पाते। विजिबिलिटी कम होने पर भी पीछे वाली गाड़ी को पता चल जाएगा कि आगे वाली गाड़ी ने अचानक ब्रेक लगाए हैं। इसके अलावा, इंटरसेक्शन पर सामने से आने वाली गाड़ी का सिग्नल भी पहले ही मिल जाएगा।
खर्च और अनुमानित लागत
सरकार इस पूरे प्रोग्राम पर करीब 5,000 करोड़ रुपए खर्च कर सकती है। ऑन-बोर्ड यूनिट की कीमत 5,000 से 7,000 रुपए के बीच रहने का अनुमान है।



