भारत-यूके का ऐतिहासिक आर्थिक युग

15 जुलाई 2026 से भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच 'Comprehensive Economic and Trade Agreement' (CETA) और 'Double Contribution Convention' (DCC) लागू होने जा रहे हैं। यह भारत के 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को नई गति देगा, जिससे निर्यात में उछाल, पेशेवरों के लिए राहत और व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे।

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15 जुलाई 2026 से भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच ‘Comprehensive Economic and Trade Agreement’ (CETA) और ‘Double Contribution Convention’ (DCC) लागू होने जा रहे हैं। यह भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को नई गति देगा, जिससे निर्यात में उछाल, पेशेवरों के लिए राहत और व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे।

एक नई आर्थिक सुबह

भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में 15 जुलाई 2026 एक स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने वाली तारीख है। भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुए ‘कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट’ (CETA) और ‘एग्रीमेंट ऑन सोशल सिक्योरिटी’ (जिसे डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन – DCC भी कहा जाता है) के प्रभावी होने के साथ ही दोनों देशों के संबंधों में एक नए युग की शुरुआत हो रही है। यह महज दो देशों के बीच का व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम है।

क्या है यह ऐतिहासिक समझौता?

मई 2021 में शुरू हुई ‘Enhanced Trade Partnership’ और ‘इंडिया-यूके रोडमैप 2030’ की नींव पर खड़ी यह इमारत अब बनकर तैयार है। 6 मई 2025 को संपन्न हुए CETA और 10 फरवरी 2026 को हस्ताक्षरित DCC ने एक ऐसी रूपरेखा तैयार की है, जो न केवल व्यापार को बढ़ावा देगी, बल्कि मानवीय और सामाजिक सुरक्षा के हितों की भी रक्षा करेगी।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने इसे “आर्थिक कूटनीति की जीत” बताते हुए कहा है कि यह समझौता हमारे निर्यातकों को विश्व स्तरीय मंच प्रदान करेगा और भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Value Chains) में मजबूती से एकीकृत करेगा।

व्यापार में क्रांतिकारी बदलाव: निर्यातकों की बल्ले-बल्ले

इस समझौते की सबसे बड़ी खूबी है—शुल्क-मुक्त व्यापार। भारत के निर्यातकों को अब यूके के बाजार में 99% टैरिफ लाइनों पर तुरंत ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा। आइए जानते हैं किन क्षेत्रों को होगा सबसे ज्यादा लाभ:

  • प्रोसेस्ड फूड: 70% तक टैरिफ खत्म।
  • मरीन उत्पाद (मछली): 21.5% तक टैरिफ में राहत।
  • इंजीनियरिंग और ऑटो कंपोनेंट्स: 18% तक टैरिफ समाप्त।
  • चमड़ा और फुटवियर: 16% तक की छूट।
  • टेक्सटाइल्स और परिधान: 12% तक का टैरिफ शून्य।
  • केमिकल्स और फार्मा: 8% तक टैरिफ में कमी।

यह न केवल बड़े उद्योगों के लिए है, बल्कि हमारे बुनकरों, शिल्पकारों और MSMEs के लिए भी एक बड़ा मौका है। साथ ही, भारत ने अपनी संवेदनशीलता का ध्यान रखते हुए डेयरी, अनाज, बाजरा और तिलहन जैसे क्षेत्रों को सुरक्षित रखा है ताकि हमारे किसानों के हितों पर कोई आंच न आए।

पेशेवरों के लिए खुशखबरी: DCC से मिलेगी बड़ी राहत

भारतीय पेशेवरों के लिए ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन’ (DCC) एक गेम-चेंजर साबित होगा। पहले यूके में काम करने वाले भारतीयों को सामाजिक सुरक्षा के लिए दोहरी कटौती का सामना करना पड़ता था। अब:

  1. छूट की अवधि: इसे 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है।
  2. लाभार्थी: 75,000 से अधिक भारतीय पेशेवर और 900 से ज्यादा भारतीय कंपनियां सीधे तौर पर लाभान्वित होंगी।

यह कदम भारतीय प्रतिभा को यूके में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा और उनकी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखेगा।

सेवा क्षेत्र का विस्तार: शेफ से लेकर योगा गुरु तक को मौका

CETA केवल सामानों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है। यूके ने भारत के लिए अपने सेवा क्षेत्र के 137 उप-क्षेत्रों को खोल दिया है। IT, फाइनेंस, स्वास्थ्य सेवा, इंजीनियरिंग और कंसल्टेंसी के साथ-साथ एक अनूठी पहल भी की गई है:

  • अब हर साल 1,800 भारतीय शेफ, योग प्रशिक्षक और शास्त्रीय संगीतकार यूके में अपनी कला का प्रदर्शन कर सकेंगे। यह सांस्कृतिक और व्यावसायिक मेलजोल का एक अनूठा उदाहरण है।

स्टील उद्योग की सुरक्षा

कई लोगों को चिंता थी कि यूके के नए स्टील नियमों का असर भारत पर पड़ेगा, लेकिन दोनों देशों की समझदारी से इसे भी सुलझा लिया गया है। भारत के स्टील निर्यात का 85% हिस्सा इन सख्त नियमों के दायरे से बाहर रखा गया है, जिससे हमारे निर्यातकों को एक स्थिर व्यापारिक वातावरण मिलेगा।

निष्कर्ष: भविष्य की ओर बढ़ते कदम

30 अध्यायों में बँटा यह ‘नेक्स्ट-जेनरेशन’ व्यापार समझौता डिजिटल व्यापार, बौद्धिक संपदा (IPR), टिकाऊ विकास और पारदर्शिता के आधुनिक सिद्धांतों पर आधारित है। यह समझौता यह सुनिश्चित करता है कि भारत केवल एक बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक निर्माण का एक प्रमुख केंद्र बने।

यह समझौता भारत के उन करोड़ों युवाओं, उद्यमियों, किसानों और पेशेवरों के लिए एक नई उम्मीद की किरण है जो ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं। 15 जुलाई 2026 से, भारत और यूके के बीच व्यापार का एक नया सूरज उगेगा, जो दोनों देशों की समृद्धि को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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