नई दिल्ली: यूपी और राजस्थान के कई शहर गर्मी में पानी के संकट से जूझते हैं। फिर भी, इन राज्यों में सबसे ज्यादा पानी की बर्बादी हो रही है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) और राज्य सरकारें भूजल रिचार्ज और निकासी की रिपोर्ट ‘भारत के डायनमिक ग्राउंड वॉटर रिसोर्सेज के राष्ट्रीय संकलन-2024’ में इसका खुलासा हुआ। इनके बाद तमिलनाडु, पंजाब और हरियाणा हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन राज्यों में ओसीएस की संख्या (अति दोहित, क्रिटिकल एवं सेमी क्रिटिकल) की संख्या ज्यादा है।
102 जिलों में सबसे ज्यादा पानी की बर्बादी
रिपोर्ट के अनुसार, देश के 102 जिलों में ग्राउंड वॉटर रिचार्ज से ज्यादा पानी की बर्बादी होती है। 22 जिले क्रिटिकल श्रेणी में रखे गए हैं। यानी यहां भूजल रिचार्ज के करीब पानी का दोहन हो रहा है। इसी तरह 69 जिले सेमी क्रिटिकल (70-80 फीसदी पानी की बर्बादी) में हैं। 193 जिले ओसीएस (अत्यधिक-शोषण वाले, क्रिटिकल और सेमी क्रिटिकल) कैटिगरी में हैं।
राज्यवार स्थिति
| राज्य | अत्यधिक जल दोहन | क्रिटिकल | सेमी क्रिटिकल | ओसीएस |
| पडुचेरी | 0 | 0 | 1 | 1 |
| दिल्ली | 5 | 4 | 1 | 10 |
| दादरा नगर हवेली व दमन और दीव | 3 | 0 | 0 | 3 |
| प. बंगाल | 0 | 0 | 1 | 1 |
| यूपी | 5 | 7 | 26 | 38 |
| तेलंगाना | 1 | 0 | 2 | 3 |
| तमिलनाडु | 9 | 3 | 10 | 22 |
| राजस्थान | 29 | 0 | 0 | 29 |
| पंजाब | 19 | 1 | 0 | 20 |
| महाराष्ट्र | 0 | 0 | 5 | 5 |
| मध्य प्रदेश | 6 | 1 | 6 | 139 |
| केरल | 0 | 0 | 2 | 8 |
| कर्नाटक | 5 | 4 | 4 | 14 |
| झारखंड | 0 | 0 | 1 | 1 |
| हरियाणा | 16 | 1 | 2 | 1 |
| गुजरात | 4 | 0 | 2 | 6 |
| छत्तीसगढ़ | 0 | 1 | 3 | 4 |
| बिहार | 0 | 0 | 2 | 2 |
| कुल | 102 | 22 | 69 | 193 |
आधुनिक तकनीकी से पानी का बचाव
वॉटर मैनेजमेंट और बचाव आधुनिक तकनीकी के उपयोग से किया जा रहा है। जल शक्ति अभियानः कैच द रेन (जेएसए-सीटीआर) में जल निकायों की गणना, जियो टैगिंग और उसकी लिस्ट तैयार की जा रही है। पुराने रिकॉर्ड, रिमोट सेंसिंग डेटा और मैपिंग तकनीक के जरिये जल निकायों की गणना, दायरे चिह्नित किए जा रहे हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) ने वेब आधारित ऐप इंडिया-ग्राउंडवॉटर रिसोर्स एस्टिमेशन सिस्टम तैयार किया है। इससे पूरे देश में ग्राउंड वॉटर संसाधन का वैल्यूएशन आसानी से हो रहा है। सीजीडब्ल्यूबी 5,260 डिजिटल वॉटर लेवल रिकॉर्डर्स (डीडब्ल्यूएलआर) के नेटवर्क से देश भर में रियलटाइम में भूजल स्तर की निगरानी करता है। यह टेलीमेट्री सिस्टम से लैस है। वॉटर रिचार्ज एरिया की पहचान, सोर्स का आकलन और ग्राउंड वॉटर का वैल्यूएशन में भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) रिमोर्ट सेंसिंग को एक करने के लिए क्वीफायर मैपिंग का इस्तेमाल किया जाता है।
इनके अलावा पोर्टल “जल धरोहर”, कमान क्षेत्र विकास और जल प्रबंधन (एमसीएडी) योजना नियोजन के लिए जीआईएस और उपग्रह डेटा का उपयोग, राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना (एनएचपी) के तहत रियल टाइम डेटा अधिग्रहण प्रणाली (आरटीडीएएस) स्थापित किए गए हैं।
ग्राउंड वॉटर में सिलेनियम उच्च स्तर पर मिला
ग्राउंड वॉटर में सिलेनियम उच्च स्तर पर पहुंच गया है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्लूबी) के अनुसार, भूजल की गुणवत्ता के लिए 2019 में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, दादरा और नगर हवेली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, नागालैंड, पंजाब, तेलंगाना और त्रिपुरा सहित 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से सेलेनियम के लिए 5,956 भूजल नमूने एकत्र किए और उनका विश्लेषण के बाद यह परिणाम आया है। इन सैंपल में से केवल चार में सेलेनियम 10 पीपीबी की अनुमेय सीमा से अधिक पाई गई। ये नमूने हरियाणा के झज्जर और पंजाब के रूपनगर (रोपड़) जिले से थे।



