ग्रामीण विकास की बदलती तस्वीर: 2047 के संकल्प की ओर एक ठोस कदम
नई दिल्ली: भारत आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ ग्रामीण अर्थव्यस्था का पुनरुद्धार ही राष्ट्र के ‘विकसित भारत @2047’ के सपने को साकार करने की सबसे मजबूत कड़ी है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने हाल ही में ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ के क्रियान्वयन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी होने जा रहे इस अधिनियम का उद्देश्य केवल ग्रामीण स्तर पर रोजगार देना नहीं, बल्कि गांवों को विकास के नए मॉडल के रूप में स्थापित करना है।
क्षेत्रीय अधिकारियों की विशेष भूमिका: जमीनी स्तर पर बदलाव के सारथी
इस अधिनियम के सुचारू संचालन के लिए मंत्रालय ने देशभर में 100 से अधिक क्षेत्रीय अधिकारियों को तैनात करने का निर्णय लिया है। ये अधिकारी महज सरकारी प्रतिनिधि नहीं, बल्कि ‘सुविधादाता’ (Facilitators) और ‘संसाधन व्यक्ति’ (Resource Persons) के रूप में कार्य करेंगे।
इन अधिकारियों की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और जिला प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने की होगी। उनका मुख्य ध्यान निम्नलिखित बिंदुओं पर रहेगा:
- स्थानीय क्षमताओं का सुदृढ़ीकरण: हर जिले की अपनी विशिष्ट आवश्यकताएं होती हैं। क्षेत्रीय अधिकारी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का आकलन कर उन्हें बेहतर तरीके से उपयोग करने में मदद करेंगे।
- ज्ञान साझा करना (Knowledge Sharing): एक राज्य की सर्वोत्तम प्रथाएं (Best Practices) दूसरे राज्य के लिए प्रेरणा बन सकती हैं। यह तंत्र राज्यों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा।
- परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करना: जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में आने वाली तकनीकी या प्रशासनिक समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना इनकी प्राथमिकता होगी।
इन अधिकारियों को ग्रामीण विकास विभाग द्वारा एक गहन विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से तैयार किया गया है। ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल के मार्गदर्शन और संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भाजीभाकरे के नेतृत्व में, इन अधिकारियों को अधिनियम की तकनीकी बारीकियों, प्रौद्योगिकी आधारित शासन और संस्थागत ढांचे के बारे में विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया है।
एक व्यापक दृष्टिकोण: वेतन से परे आजीविका की ओर
पारंपरिक रोजगार योजनाओं से इतर, ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन’ का दृष्टिकोण कहीं अधिक विस्तृत है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार को केवल ‘श्रमिकों को वेतन भुगतान’ तक सीमित न रखकर उसे निम्नलिखित स्तंभों से जोड़ना है:
- आजीविका संवर्धन: कौशल विकास के जरिए ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को स्थायी आजीविका के अवसरों से जोड़ना।
- जलवायु अनुकूलन (Climate Resilience): ग्रामीण अवसंरचना निर्माण के दौरान पर्यावरण के अनुकूल और जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखने वाली तकनीकों का उपयोग करना।
- तकनीकी आधारित शासन: जीआईएस (GIS) आधारित नियोजन और डेटा-संचालित निर्णय प्रक्रिया के माध्यम से संसाधनों का सटीक आवंटन करना।
- विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP): ग्राम पंचायतों को विकास का केंद्र बिंदु बनाना और उन्हें नियोजन की स्वायत्तता प्रदान करना।
डिजिटल क्रांति और वित्तीय तैयारी
किसी भी बड़े सुधार की सफलता उसकी वित्तीय और तकनीकी तैयारी पर निर्भर करती है। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 95,692 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन स्वीकृत किया है, जो इस मिशन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
प्रौद्योगिकी के मोर्चे पर भी सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं:
- डीबीटी-स्पर्श प्लेटफॉर्म: सभी राज्यों को इस प्लेटफॉर्म से जोड़कर वित्तीय लेनदेन को पारदर्शी और त्वरित बना दिया गया है।
- ई-केवाईसी और फेस ऑथेंटिकेशन: लगभग 93% सक्रिय श्रमिकों का ई-केवाईसी पूर्ण हो चुका है, जिससे फर्जीवाड़ा रुक रहा है और वास्तविक लाभार्थियों तक सीधे लाभ पहुंच रहा है।
- डिजिटल उपस्थिति: फेस ऑथेंटिकेशन आधारित प्रणाली ने कार्यस्थलों पर जवाबदेही सुनिश्चित की है।
राज्यों की सक्रिय भागीदारी
यह अधिनियम ‘सहकारी संघवाद’ (Cooperative Federalism) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। अब तक 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस अधिनियम के लिए अपने-अपने बजटीय प्रावधान कर लिए हैं। कई राज्यों ने पहले ही ‘वीबी-जी राम जी’ (VB-G Ram Ji) ढांचे के तहत अपनी राज्य विशिष्ट योजनाओं को अधिसूचित कर दिया है। बाकी राज्य भी इस प्रक्रिया के अंतिम चरणों में हैं।
निष्कर्ष: 2047 का लक्ष्य और हमारी जिम्मेदारी
1 जुलाई, 2026 से जब यह अधिनियम पूर्णतः धरातल पर उतरेगा, तो यह ग्रामीण भारत में एक नया अध्याय लिखेगा। यह न केवल रोजगार की गारंटी देगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक अवसंरचना, डिजिटल साक्षरता और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नींव रखेगा। विकसित भारत का सपना गांवों की समृद्धि के बिना अधूरा है, और यह मिशन उस सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
जमीनी स्तर पर संवाद, पारदर्शी डिजिटल सिस्टम और अधिकारियों की सक्रिय तैनाती के साथ, अब ग्रामीण विकास केवल एक सरकारी फाइल का हिस्सा नहीं, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी का मिशन बन गया है।



