नई दिल्ली: भारत की एक्ट ईस्ट नीति को इस बार नए आयाम मिलने की संभावना जताई जा रही हैं; ऐसा इसलिए क्योंकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 1 नवंबर 2025 को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर जाएंगे; जहां 12वीं ADMM-Plus यानी आसियान रक्षा मंत्री बैठक-प्लस में भाग लेंगे। साथ ही इस बैठक से एक दिन पहले 31 अक्टूबर को मलेशिया की अध्यक्षता में आसियान-भारत रक्षा मंत्रियों की एक और अनौपचारिक बैठक भी संबोधित करेंगे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इन बैठकों का उद्देश्य भारत और आसियान देशों और अन्य ADMM-Plus देशों के बीच रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना है।
ADMM-Plus बैठक क्यों है महत्वपूर्ण.?
इस दो दिवसीय यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री की समकक्ष मंत्रियों और मलेशिया के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बैठक होने की संभावना है। भारत 2024–2027 तक मलेशिया के साथ आतंकवाद निरोधक विशेषज्ञ कार्य समूह का सह-अध्यक्ष है। इसके अलावा, आसियान-भारत समुद्री अभ्यास का दूसरा संस्करण 2026 में आयोजित किया जाना है।
आपको बता दें कि ADMM-Plus की पहली बैठक का आयोजन वर्ष 2010 में हनोई (वियतनाम) में किया गया था। तब से यह संवाद का महत्वपूर्ण मंच है। ADMM-Plus में दस आसियान देशों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, न्यूजीलैंड, कोरिया गणराज्य, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं।
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क्या है ASEAN?
आसियान (ASEAN) यानी एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस की स्थापना 8 अगस्त 1967 को हुई थी, जिसमें प्रारंभिक सदस्य इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड थे। बाद में इसमें ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया शामिल हुए। इसका उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया में राजनीतिक, आर्थिक, सुरक्षा और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है। भारत 1992 से आसियान का वार्ता साझेदार है और 2010 से एडीएमएम-प्लस का सक्रिय सदस्य है।



