नई दिल्ली: महात्मा गांधी, जिनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ, ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूलों में प्राप्त की। पोरबंदर और राजकोट के छोटे-छोटे स्कूलों में स्थानीय शिक्षकों ने उन्हें पढ़ाया, जिन्होंने गांधीजी के मन में नैतिकता और सादगी के बीज बोए। इन शिक्षकों के नाम भले ही इतिहास में गुमनाम हो, लेकिन उनकी शिक्षाओं ने गांधी के चरित्र को आकार दिया। बाद में, गांधीजी ने अपनी आत्मकथा सत्य के साथ मेरे प्रयोग में गोपालकृष्ण गोखले को अपना राजनीतिक गुरु बताया। गोखले ने उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की बारीकियां सिखाईं और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। गोखले की सलाह और मार्गदर्शन ने गांधीजी को एक वैश्विक नेता बनाया।
जवाहरलाल नेहरू के शिक्षक: वैज्ञानिक सोच का आधार
14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में जन्मे जवाहरलाल नेहरू की प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई। उनके पिता मोतीलाल नेहरू ने विदेशी शिक्षकों को नियुक्त किया, जिनमें फर्डिनेंड टी. ब्रूक्स का नाम प्रमुख है। ब्रूक्स, एक आयरिश शिक्षक, ने नेहरू को अंग्रेजी साहित्य, इतिहास और विज्ञान पढ़ाया। उनकी शिक्षाओं ने नेहरू की तार्किक और वैज्ञानिक सोच को मजबूत किया, जो बाद में उनकी नीतियों और लेखन में झलकता है। ब्रूक्स के अलावा, नेहरू ने हैरो और कैंब्रिज में भी शिक्षा प्राप्त की, जहां प्रोफेसरों ने उनकी वैश्विक दृष्टि को विस्तार दिया। इन गुरुओं ने भारत के पहले प्रधानमंत्री के विचारों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मोहम्मद अली जिन्ना के शिक्षक: भाषा और नेतृत्व का पाठ
पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना, जिनका जन्म 25 दिसंबर 1876 को कराची में हुआ, ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सिंध मदरसतुल इस्लाम में प्राप्त की। वहां के स्थानीय शिक्षकों ने उन्हें उर्दू, गुजराती और अंग्रेजी सिखाई, जिसने उनकी वकालत और नेतृत्व क्षमता को निखारा। जिन्ना ने भी गोपालकृष्ण गोखले को अपना राजनीतिक गुरु माना। गोखले की उदारवादी विचारधारा और रणनीतिक सोच ने जिन्ना को शुरुआती राजनीतिक जीवन में प्रेरित किया।
शिक्षकों का अमर योगदान
शिक्षक दिवस, जो 5 सितंबर को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर मनाया जाता है, हमें उन गुरुओं की याद दिलाता है जिन्होंने इतिहास के महानायकों को दिशा दी। गांधी, नेहरू और जिन्ना जैसे व्यक्तित्वों के पीछे उनके शिक्षकों का योगदान आज भी प्रेरणा देता है।



