नई दिल्ली: सामान्य तौर पर सामाजिक कार्यकर्ता और योजना आयोग की पूर्व सदस्य सैयदा हमीद ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को वापस भेजने की वकालत करते हुए अपनी ही बात से यू-टर्न ले लिया है। तीन दिन पहले उन्होंने कहा था कि बांग्लादेशी भी इंसान हैं और वे भारत में रह सकते हैं, जिस पर काफी राजनीतिक हंगामा और विरोध हुआ था।
क्या था विवादित बयान
सैयदा हमीद ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा था, “बांग्लादेशी भी इंसान हैं; धरती बहुत बड़ी है, बंगलादेशी भी यहाँ रह सकते हैं, अल्लाह ने यह धरती इंसानों के लिए बनाई है, शैतान के लिए नहीं। किसी इंसान को इतनी बेरहमी से क्यों निकाला जाए।”उन्होंने असम सरकार पर बेदखली अभियानों के दौरान अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ अमानवीय कृत्य करने का /आरोप लगाया था और कहा था कि असम में मुसलमानों को अक्सर बांग्लादेशी बताकर प्रताड़ित किया जाता है।
बयान पर तीखी प्रतिक्रिया
हमीद की इस टिप्पणी पर असम में सियासी भूचाल आ गया था। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उन पर अवैध घुसपैठियों का समर्थन करने का आरोप लगाया था। सरमा ने कहा था कि ऐसे बयान असमिया लोगों की पहचान के लिए खतरा हैं और यह “असम को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने के जिन्ना के सपने को साकार करने” का प्रयास है। उन्होंने हमीद को गांधी परिवार का करीबी भी बताया था। इसी बीच, मंगलवार को हिंदू सेना के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में उस कार्यक्रम स्थल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, जहां सैयदा हमीद हिस्सा लेने वाली थीं। उन्होंने हमीद पर बांग्लादेशी घुसपैठियों का बचाव करने का आरोप लगाया।
तीन दिन में ही लिया यू-टर्न
विवादों के बाद, सैयदा हमीद ने मंगलवार को अपने बयान पर सफाई दी। उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी टिप्पणी से काफी हंगामा हुआ। उन्होंने कहा, “अचानक, मेरा नाम पूरे भारत में गूंजने लगा… बांग्लादेशी अब एक अपशब्द बन गया है।”
इसके बाद उन्होंने अपने पहले के रुख से हटते हुए कहा, “अगर कुछ बांग्लादेशी भी आ गए हैं, तो उनके साथ बैठिए, उनसे बातचीत कीजिए और उन्हें वापस भेजिए।” यह बयान उनके पहले की “मानवीय” टिप्पणी के बिल्कुल विपरीत है। यह यू-टर्न राजनीतिक दबाव और जनता के विरोध का परिणाम माना जा रहा है।



