नई दिल्ली: स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) की चयन पोस्ट फेज 13 भर्ती परीक्षा में हो रही गड़बड़ियों से नाराज छात्रों संग शिक्षक सड़क पर उतरे। संसद सत्र के दौरान होने वाले विरोध प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद था। संसद मार्ग को बैरीकेड कर दिया गया था। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने एसएससी के खिलाफ नारेबाजी की। हंगामा बढ़ने पर पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए छात्रों और कई शिक्षकों को हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वाजिब मांगों पर पुलिस जवाब नहीं दे रही है। इसकी जगह उनको बस पर बिठाकर बीते चार घंटों से दिल्ली की सड़कों पर घुमाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने इसे असंवेदनशीलता की हद करार दिया।
उधर, मसला प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ा होने से सोशल मीडिया पर भी यह ट्रेंड करता दिखा। बृहस्पतिवार दोपहर विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद सोशल साइटस एक्स पर चार टाप ट्रेंड इसी से जुड़े हुए थे। इनमें #SSC_System_Sudharo, #SSCMisManagement, #SSCVendorFailure, #sscReforms2025 शामिल थे। अचानक ट्रेंड में आए इस इश्यू ने आम व्यूअर का भी ध्यान खींचा और वह इस पर अपनी राय जाहिर करते दिखे।
वहीं, प्रदर्शनकारी SSC और कार्मिक मंत्रालय से जवाब मांगते दिखे। अभ्यर्थियों ने 31 जुलाई को “दिल्ली चलो” आंदोलन का आह्वान किया। इसका देशभर के प्रमुख SSC की तैयारी कराने वाले शिक्षकों का भी खुला समर्थन मिला। यह खुद भी छात्रों के साथ मैदान में उतरकर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और निजी वेंडर को हटाने की मांग कर रहे।
बार-बार रद्द हो रही हैं परीक्षाएं, तकनीकी गड़बड़ियां बनी बड़ी परेशानी
इससे पहले पवन गंगा एजुकेशनल सेंटर 2 में 24 से 26 जुलाई तक की परीक्षाएं “प्रशासनिक कारणों” से रद्द कर दी गईं। वहीं, हुबली स्थित एजुकासा इंटरनेशनल सेंटर में 24 जुलाई की पहली शिफ्ट तकनीकी खराबी के कारण बीच में ही रोक दी गई।
प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि कई छात्रों को परीक्षा रद्द होने की सूचना समय पर नहीं मिली। वह सैकड़ों किमी की यात्रा करके सेंटर पर पहुंचे थे। इससे समय, पैसे और मेहनत-तीनों का नुकसान हुआ। विद्यार्थियों को मिले दूर-दराज के सेंटर, बुनियादी सुविधाओं का अभाव,तकनीकी गड़बड़ियों के साथ-साथ परीक्षा केंद्रों की हालत भी बेहद खराब बताई जा रही है।
आरोप है कि कई केंद्रों पर न तो पंखे थे, न ही पर्याप्त कुर्सियां और न ही पेयजल की सुविधा। छात्रों को उनके घर से 500 से 1000 किमी दूर परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए, जिससे यात्रा और रहने का खर्च भी बढ़ गया। SSC द्वारा नियुक्त नए निजी वेंडर पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कुछ छात्रों ने दावा किया कि यह वही कंपनी है, जिसे पहले किसी हाई कोर्ट ने “धोखाधड़ी” के आरोप में फटकार लगाई थी।
सोशल मीडिया पर SSC कोचिंग शिक्षकों का फूटा गुस्सा
SSC की तैयारी कराने वाले देशभर के मशहूर शिक्षक भी अब खुलकर इस गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं;
- नीतू सिंह (@NeetuSingh202): “बार-बार परीक्षा रद्द और खराब व्यवस्था से छात्र परेशान हैं। हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद हो! #SSCReforms #SSCVendorFailure”
- आदित्य रंजन (@adityaranjan108): “ये अब सिर्फ अव्यवस्था नहीं, एक प्रकार का अत्याचार है। छात्रों को जब परीक्षा देने जाएं और मार खाकर लौटें, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। #SSCMisManagement”
- इनके अलावा राहुल कुशवाहा और सोनिया देशवाल ने भी मैनेजमेंट पर सवाल उठाए और खुल कर अपनी नाराजगी सोशल मीडिया पर जाहिर की।
छात्रो की मांगें और सुधार की पुकार
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें;
- SSC को अपनी इन-हाउस परीक्षा प्रणाली विकसित करनी चाहिए
- मौजूदा वेंडर को तत्काल हटाया जाए
- जिन छात्रों की परीक्षा रद्द हुई, उन्हें मुआवजा या दोबारा परीक्षा का अवसर मिले
- संचार और लॉजिस्टिक्स में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए
सरकार और आयोग की चुप्पी
अभी तक इस मसले में SSC ने कोई औपचारिक बयान नहीं जारी किया है। केवल कुछ शिफ्ट्स की रद्दीकरण और पुनर्निर्धारण की सूचना वेबसाइट पर दी गई है। वहीं, छात्रों में परीक्षा रद्द होने से नाराजगी है। सड़क पर उतरकर प्रदर्शनकारी आयोग से सवाल पूछते दिखे।
निष्कर्ष
SSC परीक्षा प्रणाली में इस बार जो खामियां सामने आई हैं, वे केवल तकनीकी नहीं बल्कि प्रणालीगत विफलता को उजागर करती हैं। लाखों युवाओं का भविष्य इस व्यवस्था पर निर्भर है और यदि पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार नहीं हुए, तो यह आंदोलन एक बड़े शिक्षा सुधार अभियान में बदल सकता है।



