शरद पवार के आरोपों को शिवसेना (यूबीटी) का समर्थन

शिवसेना (यूबीटी) ने कहा है कि जब भी विपक्ष लोकतंत्र को संभालने वाली संस्थाओं पर सवाल उठाता है, तो बीजेपी क्यों परेशान हो जाती है।

Share This Article:

मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार द्वारा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर किए गए दावों को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने जोरदार समर्थन दिया है। शिवसेना (यूबीटी) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर भी निशाना साधा है और कहा है कि जब भी विपक्ष चुनाव आयोग (ECI) पर सवाल उठाता है, तो BJP को परेशानी क्यों होती है।

शरद पवार के आरोप और शिवसेना का समर्थन

शरद पवार ने हाल ही में आरोप लगाया था कि एक पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि BJP महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में से 160 सीटों पर जीत हासिल करेगी, चाहे मतदाता कुछ भी फैसला करें। इस बयान को चुनाव में संभावित धांधली और भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने पवार का समर्थन किया। दुबे ने कहा कि अगर शरद पवार जैसे अनुभवी और वरिष्ठ नेता इस तरह के सवाल उठा रहे हैं, तो इसका मतलब है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में कोई गंभीर खामी है। उन्होंने सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग को भ्रमित किया जा सकता है, क्या चुनाव में धांधली की जा सकती है और क्या उसमें भ्रष्टाचार होता है?

BJP पर निशाना

आनंद दुबे ने BJP पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष के किसी भी नेता, चाहे वह राहुल गांधी हों या शरद पवार, के चुनाव आयोग पर सवाल उठाने पर BJP तुरंत परेशान हो जाती है। दुबे ने कहा, “हम तो बस लोकतंत्र को संभालने वाली संस्था पर सवाल उठा रहे हैं। हमारी मांग है कि चुनाव आयोग को आगे आकर इन आरोपों का जवाब देना चाहिए।” उन्होंने कहा कि विपक्ष का सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा है और BJP को इससे असहज नहीं होना चाहिए।

चुनाव आयोग पर निष्क्रियता का आरोप

दुबे ने चुनाव आयोग पर “कुंभकरण की नींद” में होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछले छह महीनों से राहुल गांधी और उनकी टीम लगातार चुनाव आयोग से डिजिटल वोटिंग रिकॉर्ड की प्रतियां मांग रही थी, लेकिन उन्हें नहीं दी गईं। दुबे ने कहा, “इतनी मेहनत और बार-बार के अनुरोध के बाद भी चुनाव आयोग ने कोई कदम नहीं उठाया।”

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

शिवसेना (यूबीटी) ने अपनी मांग को और बढ़ाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। आनंद दुबे ने कहा कि जिस तरह पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन पर देश के हर बच्चे को भरोसा था, वैसा भरोसा आज के चुनाव आयोग पर नेताओं को भी नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है, लेकिन वर्तमान हालात में उसकी साख पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, इसलिए मुख्य चुनाव आयुक्त को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

इसको भी पढ़ें: रक्षा बंधन पर यहां मिलेगी मुफ्त बस सफर की सुविधा

शरद पवार का राजनीतिक अनुभव और विश्वसनीयता

वरिष्ठ नेता: शरद पवार महाराष्ट्र और भारतीय राजनीति के सबसे अनुभवी और सम्मानित नेताओं में से एक हैं। उनका राजनीतिक करियर दशकों पुराना है।

बयान का महत्व: जब शरद पवार जैसा नेता कोई दावा करता है, तो उसे गंभीरता से लिया जाता है। उनके आरोपों को केवल राजनीतिक बयानबाजी के रूप में खारिज करना मुश्किल होता है, क्योंकि उनके पास अक्सर गहरी जानकारी होती है।

 महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनाव

चुनाव की तैयारी: महाराष्ट्र में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। सभी राजनीतिक दल, विशेष रूप से भाजपा और विपक्षी गठबंधन (महा विकास अघाड़ी), अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप दे रहे हैं।

विपक्षी एकता: यह खबर दिखाती है कि महा विकास अघाड़ी (जिसमें शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) शामिल हैं) के नेता एकजुट होकर चुनाव आयोग और भाजपा पर सवाल उठा रहे हैं। यह विपक्षी एकता का एक महत्वपूर्ण संकेत है।

चुनाव आयोग पर उठते सवाल

विपक्षी दलों की शिकायतें: पिछले कुछ सालों से, विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं।

राहुल गांधी का मामला: खबर में राहुल गांधी का जिक्र किया गया है, जिन्होंने डिजिटल वोटिंग रिकॉर्ड की प्रतियां मांगी थीं, लेकिन उन्हें नहीं मिलीं। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर कांग्रेस लगातार जोर दे रही है। यह दिखाता है कि चुनाव आयोग पर सवाल उठाने का यह कोई नया मामला नहीं है।

टीएन शेषन का जिक्र: शिवसेना (यूबीटी) ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण दिया है। शेषन को उनकी सख्त और निष्पक्ष कार्यप्रणाली के लिए जाना जाता था। उनकी तुलना वर्तमान चुनाव आयोग से करके, विपक्ष यह बताने की कोशिश कर रहा है कि चुनाव आयोग ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है।

 भाजपा का बचावत्मक रुख

तुरंत प्रतिक्रिया: जब भी विपक्ष चुनाव आयोग या ईवीएम पर सवाल उठाता है, भाजपा तुरंत उसे “हार का बहाना” बताकर खारिज कर देती है। “मिर्ची लगने” का आरोप: शिवसेना (यूबीटी) का यह आरोप कि “भाजपा को मिर्ची क्यों लगती है” इस बात पर केंद्रित है कि भाजपा विपक्ष के सवालों को सीधे जवाब देने की बजाय, उन्हें राजनीतिक हमले के रूप में देखती है।

गौरतलब है कि शरद पवार का बयान सिर्फ एक आरोप नहीं है, बल्कि यह विपक्ष की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वे चुनाव से पहले चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जनता का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।

NewG Network

contact@newgindia.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.