नई दिल्ली। आज के डिजिटल युग में सेमीकंडक्टर तकनीक राष्ट्रीय विकास एवं सामरिक स्वावलंबन की कुंजी बन चुकी है। यही वजह है कि आर्थिक वृद्धि और तकनीकी सशक्तीकरण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए भारत सरकार ने कई मजबूत पहल किए हैं, जिसकी वजह से भारत तकनीकी मानचित्र पर दुनिया का विश्वसनीय साझेदार बनने की ओर अग्रसर है। भारत आने वाले समय में तकनीक का निर्माता बनेगा इसकी बानगी दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित सेमीकॉन इंडिया-2025 में भी दिखी, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब भारत की सबसे छोटी चिप दुनिया के सबसे बड़े बदलाव की आधारशिला रखेगी।
सेमीकंडक्टर आधुनिक सभ्यता की धड़कन
सेमीकंडक्टर सिर्फ एक चिप नहीं है बल्कि आधुनिक सभ्यता की धड़कन और जीवनरेखा है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में भारत अगले 25 वर्षों के लक्ष्य पर काम कर रहा है। राष्ट्र इस सपने को पूरा करने के लिए काम कर रहा है कि आने वाले वर्षों में दुनिया की हर डिवाइस में मेड इन इंडिया या इंडियन मेड चिप हो। सेमीकॉन इंडिया-2025 के उद्घाटन समारोह में पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया भारत पर भरोसा करती है और दुनिया भारत को सेमीकंडक्टर का भविष्य बनाने के लिए तैयार है।
डिजिटल हीरा चिप
सेमीकंडक्टर की दुनिया में अक्सर कहा जाता है कि ‘तेल काला सोना’ था लेकिन ‘चिप डिजिटल हीरा’ है। तेल ने पिछली सदी को आकार दिया वहीं 21वीं सदी की शक्ति अब छोटी चिप पर केंद्रित है। आकार में छोटा होने के बावजूद ये चिप वैश्विक प्रगति को तेजी से बढ़ाने की क्षमता रखती है। वैश्विक सेमीकंडक्टर का बाजार पहले ही 600 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है और आने वाले वर्षों में इसके एक ट्रिलियन डॉलर से अधिक होने की उम्मीद की जा रही है।
2023 में पहला सेमीकंडक्टर संयंत्र स्वीकृत
वर्ष 2021 में सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी और वर्ष 2023 में भारत का पहला सेमीकंडक्टर संयंत्र भी स्वीकृत हुआ। अब तो कई और संयंत्रों को स्वीकृति मिल गई है। देश भर में प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल के तहत सेमीकंडक्टर पार्क विकसित किए जा रहे हैं। भारत बैकएंड ऑपरेशन से आगे बढ़कर एक पूर्ण-स्टेक सेमीकंडक्टर राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है। इस क्षेत्र में भले ही भारत की यात्रा देर से शुरू हुई है लेकिन अब भारत को कोई रोक नहीं सकता। इस वर्ष से देश में वाणिज्यिक चिप का उत्पादन भी शुरू हो जाएगा।
तैयार हो रहा मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम
भारत एक व्यापक इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है- जिसमें डिजाइनिंग, निर्माण, पैकेजिंग और उच्च तकनीक वाले उपकरण सभी शामिल हैं। सेमीकंडक्टर मिशन केवल एक फैब स्थापित करने या एक चिप बनाने तक सीमित नहीं है। भारत एक मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है जो देश को आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा। भारत सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में विश्व में सबसे उन्नत तकनीकों के साथ आगे बढ़ रहा है। नोएडा और बेंगलुरु में विकसित किए जा रहे डिजाइन केंद्र दुनिया के सबसे उन्नत चिप पर काम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में काम कर रहे या भविष्य तलाश रहे युवा उद्यमियों और स्टार्ट-अप को आश्वासन दिया कि सरकार उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।
सेमीकंडक्टर का बढ़ता व्यापार
वर्ष 2030 तक भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 110 बिलियन डॉलर का होगा।
वर्ष 2030 तक सेमीकंडक्टर का वैश्विक बाजार 1 ट्रिलियन डॉलर का होगा।
विश्व के 20% सेमीकंडक्टर डिजाइन करने वाले इंजीनियर भारत से हैं।
10 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट को अभी तक अनुमति मिली है जिसमें कुल 1.6 लाख करोड़ रुपये का निवेश।
सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में काम करने वाले 23 स्टार्टअप को मान्यता देकर वित्तीय मदद की जा रही है।
स्टार्टअप प्रोग्राम के तहत कुल 85 हजार स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग देनी है जिसमें 60 हजार को दी जा चुकी है।



