नई दिल्ली। दिसंबर महीने में खुदरा महंगाई दर (रिटेल इंफ्लेशन) पिछले महीने के मुकाबले बढ़कर 1.33 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह बीते तीन महीनों का उच्चतम स्तर है। इससे पहले नवंबर में महंगाई दर 0.71 प्रतिशत रही थी, जो लगभग 14 साल का न्यूनतम स्तर था। वहीं अक्टूबर में रिटेल महंगाई और भी नीचे आकर 0.25 प्रतिशत पर पहुंच गई थी।
सरकार ने जारी किए आंकड़े
सरकार ने सोमवार को महंगाई से जुड़े आंकड़े जारी किए। दिसंबर में महंगाई बढ़ने का प्रमुख कारण दाल, सब्जियों, मांस-मछली, अंडे और बिजली की कीमतों में इजाफा बताया गया है। खाद्य पदार्थों का महंगाई में सबसे बड़ा योगदान है। दिसंबर में खाने-पीने की वस्तुओं की महीने-दर-महीने महंगाई दर -3.91 प्रतिशत से बढ़कर -2.71 प्रतिशत हो गई। इससे कुल महंगाई दर पर भी असर पड़ा।
ग्रामीण और शहरी महंगाई दोनों में तेजी
नवंबर के मुकाबले दिसंबर में ग्रामीण महंगाई दर 0.10 प्रतिशत से बढ़कर 0.76 प्रतिशत हो गई। वहीं शहरी महंगाई 1.40 प्रतिशत से बढ़कर 2.03 प्रतिशत पर पहुंच गई, जिससे शहरी उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव ज्यादा नजर आया।
अक्टूबर में महंगाई रिकॉर्ड निचले स्तर पर
अक्टूबर में रिटेल महंगाई दर 0.25 प्रतिशत पर आ गई थी, जो मौजूदा सीरीज में अब तक का सबसे निचला स्तर था। इसका मुख्य कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतों में आई भारी गिरावट थी। इससे पहले सितंबर में महंगाई दर 1.44 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
क्या है सीपीआई जिससे मापी जाती है महंगाई
महंगाई मापने के लिए सरकार सीपीआई (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) का इस्तेमाल करती है। आसान शब्दों में कहें तो सीपीआई यह बताता है कि दूध, सब्जी, अनाज, ईंधन जैसी रोजमर्रा की वस्तुएं कितनी महंगी या सस्ती हुई हैं। इनकी कीमतों की तुलना एक बेस ईयर से की जाती है और बदलाव प्रतिशत में बताया जाता है।



