नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)की मॉनेटरी पॉलिसी की बैठक आज से शुरू हो गई है। यह मीटिंग 1 अक्टूबर तक चलने वाली है, जिसके बाद लिए गए फैसलों का ऐलान होगा। मीटिंग में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती का फैसला लिया जा सकता है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी एक हालिया रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी थी।
कारोबारियों को होगा फायदा
बैठक में अगर ब्याज दरों में कटौती का फैसला लिया जाता है तो आम लोगों को राहत मिलेगी। लोन और ब्याज दरों के कम होने से कर्ज सस्ता होगा, जिससे कारोबार बढ़ेगा। यह भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। SBI की रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी महंगाई काबू में है और आगे और कम होने की संभावना है।
SBI रिपोर्ट की माने तो अगर अभी ब्याज दरें नहीं घटाई गई तो सही समय पर गलत निर्णय लेने जैसा होगा। 2019 में जब GST दरों में कटौती हुई थी तो महंगाई 35 बेसिस पॉइंट कम हो गई थी। ऐसे में अभी ब्याज दर को कम करने से अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा। सितंबर और अक्टूबर में महंगाई दर 2 प्रतिशत से कम रह सकती है। 2027 तक महंगाई कम रहने की संभावना बनी हुई है।
RBI 3 बार घट चुका रेपो रेट
गौरतलब है कि पिछली MPC की मीटिंग 4 से 6 अगस्त के बीच हुई थी। हालांकि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया। फिलहाल रेपो रेट 5.5 प्रतिशत पर बरकरार है। जून में इसमें 0.50% कटौती की गई थी। इस साल रेपो रेट को 3 बार घटाया गया है। फरवरी में मीटिंग के दौरान इसे 6.5% से घटाकर 6.25 फीसदी किया गया, फिर अप्रैल में 0.25% कम किया गया। जून में 0.50% कमी की गई। इस तरह से रेपो रेट को 1 प्रतिशत कम किया गया है।
क्या होता है रेपो रेट
भारतीय रिजर्व बैंक आपको जिस दर पर लोन देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं। अगर इसमें बदलाव नहीं होता है तो ब्याज दरें स्थिर रहती है। मतलब न घटेगी और न बढ़ेगी। अगर रेपो रेट बढ़ जाता है तो बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा हो जाता है। इसे घटाकर सेंट्रल बैंक से मिलने वाले कर्ज को सस्ता किया जाता है। ताकि ग्राहक बैंक से ज्यादा लोन लें और इकोनॉमी में मनी फ्लो बढ़े।
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के बारे में जानिए
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी यानी मौद्रिक नीति समिति भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा गठित एक इकाई है। इसका काम रेपो रेट का निर्धारण और मौद्रिक नीति का प्रबंधन करना है। इसमें 6 सदस्य होते हैं, जिसमें 3 RBI से तो 3 की नियुक्ति भारत सरकार करती है। हर 2 महीने पर यह कमेटी मीटिंग करता है। महंगाई को कंट्रोल रखते हुए विकास दर को कैसे संतुलित रखा जाए, इसकी जिम्मेदारी इनको तय करना होता है।


