लखनऊ: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ 2020 के हाथरस सामूहिक दुष्कर्म मामले में की गई टिप्पणियों को लेकर दायर मानहानि मामले की सुनवाई सोमवार को टल गई। अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 मई 2026 को होगी। हाथरस की एमपी-एमएलए कोर्ट में न्यायाधीश दीपक नाथ सरस्वती के स्थानांतरण के कारण सोमवार को कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी।
क्या है मामला?
यह मानहानि की शिकायत उन तीन व्यक्तियों रवि, राम कुमार उर्फ रामू और लवकुश द्वारा दर्ज कराई गई है, जिन्हें दो साल के ट्रायल के बाद सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से बरी कर दिया गया था।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, राहुल गांधी ने 12 दिसंबर 2024 को बुलगढ़ी गांव के दौरे के दौरान कथित तौर पर कहा था कि मामले के आरोपी ‘खुलेआम घूम रहे हैं’, जबकि पीड़िता का परिवार अपने घर में कैद है। बरी किए गए पुरुषों का दावा है कि राहुल गांधी की इन टिप्पणियों से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को भारी ठेस पहुंची है।
1.5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग
शिकायतकर्ताओं के वकील मुन्ना सिंह पुंडीर ने बताया कि बरी किए गए तीनों व्यक्तियों की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। इससे पहले उन्हें 1.5 करोड़ रुपये (प्रत्येक के लिए 50 लाख रुपये) के हर्जाने की मांग वाला कानूनी नोटिस भी भेजा गया था।
वकील का आरोप है कि मूल मामले में केवल एक आरोपी संदीप का नाम था, जबकि अन्य तीन को बाद में फंसाया गया था, जिन्हें केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच के बाद अदालत ने बरी कर दिया था।
सुनवाई टलने का कारण
सोमवार को सुनवाई न होने का मुख्य कारण पीठासीन अधिकारी की अनुपलब्धता रही। इससे पहले 16 मार्च को भी सुनवाई नहीं हो सकी थी क्योंकि उस समय न्यायाधीश अवकाश पर थे। राहुल गांधी के वकील भगवती प्रसाद ने बताया कि आपत्ति याचिका पहले ही दायर की जा चुकी है और अब 2 मई को नई अदालत में इस पर बहस होने की उम्मीद है।



