नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी और उसके राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के बीच चल रही तल्खी शुक्रवार को संसद के उच्च सदन में सार्वजनिक हो गई। राज्यसभा के उपसभापति के रूप में हरिवंश नारायण सिंह के निर्विरोध दोबारा चुने जाने पर बधाई देते हुए राघव चड्ढा ने अपनी ही पार्टी के नेतृत्व पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए खुद को “हाल ही में हटाया गया उपनेता” बताया।
सदन में सहयोगियों की अनुपस्थिति पर उठाया सवाल
राघव चड्ढा ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा, “जिस पार्टी से मैं ताल्लुक रखता हूं, उसके नेता (संजय सिंह) आज सदन में उपस्थित नहीं हैं।” इसके बाद उन्होंने अपनी जगह नियुक्त किए गए नए उपनेता अशोक कुमार मित्तल पर निशाना साधते हुए कहा, “मेरी पार्टी के नवनियुक्त उपनेता भी सदन में मौजूद नहीं हैं। लेकिन मैं, जिसे हाल ही में उपनेता के पद से हटाया गया है, सदन में उपस्थित हूं। मुझे बोलने का अवसर देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।”
उपसभापति के साथ ‘खट्टा-मीठा’ रिश्ता
चड्ढा ने अपने संबोधन में उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को बधाई दी, लेकिन साथ ही चुटीले अंदाज में कहा कि उनके साथ अब तक के संबंध “खट्टे-मीठे” रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस नए कार्यकाल में यह रिश्ता पूरी तरह “मीठा” हो जाएगा। इसके अलावा उन्होंने सभापति और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन की भी प्रशंसा की और कहा कि उनके कार्यकाल में शून्य काल के दौरान अधिक सदस्यों को बोलने का मौका मिल रहा है।
आप और चड्ढा के बीच क्यों बढ़ी दूरियां?
राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच विवाद इस महीने की शुरुआत में तब गहराया जब 2 अप्रैल को पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के उपनेता पद से हटाकर अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंप दी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज शामिल हैं, ने चड्ढा पर “सॉफ्ट पीआर” करने और गंभीर राजनीतिक मुद्दों के बजाय समोसे की कीमत जैसे हल्के विषयों को उठाने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री मान ने तो यहां तक कह दिया कि चड्ढा की निष्ठा “संदिग्ध” है।
वही, राघव चड्ढा ने इन आरोपों को “स्क्रिप्टेड” बताते हुए खारिज किया है। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर ’48 लॉज ऑफ पावर’ किताब साझा करते हुए लिखा था, “मेरी चुप्पी को मेरी हार न समझें।”



