नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपित डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति ने वैश्विक बाजारों में तहलका मचा दिया है। इस साल अप्रैल से लागू हुए“रेसिप्रोकल टैरिफ के तहत सभी आयातों पर 10% बेसलाइन टैरिफ लगाया गया है। चीन जैसे देशों पर यह 125% पहुंच गया है। भारत पर कुल 50% टैरिफ (25% बेसिक + 25% अतिरिक्त, रूस से तेल खरीद को लेकर) 27 अगस्त 2025 से प्रभावी हो चुका है, जिससे $48 अरब के भारतीय निर्यात पर खतरा मंडरा रहा है। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वास्थ्य और ऊर्जा हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ उत्पाद श्रेणियों को इस टैरिफ बम से मुक्त रखा है। ये छूट अस्थायी हैं और भविष्य में बदल सकती हैं।
कौन-कौन से आइटम टैरिफ से बाहर हैं
ट्रंप के टैरिफ मुख्य रूप से स्टील, एल्युमिनियम, तांबा, ऑटोमोबाइल और घरेलू उपकरणों जैसे उत्पादों पर केंद्रित है जहां 25% से 50% तक शुल्क लग चुका है लेकिन अप्रैल 2025 के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर के एनेक्स II में 1000 से अधिक उत्पादों को छूट दी गई है। नीचे मुख्य उत्पाद श्रेणियां दी गई हैं जो टैरिफ से मुक्त हैं।
फार्मास्यूटिकल्स (दवाइंयां)
अमेरिका में जेनेरिक दवाओं की 40% आपूर्ति भारत से होती है और कुल $12.7 अरब का निर्यात दवा क्षेत्र से है। ट्रंप ने इस पर कोई अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगाया, क्योंकि अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली इन पर निर्भर है। हालांकि ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर कंपनियां अमेरिका में उत्पादन नहीं शिफ्ट करतीं तो दो साल में 200% तक टैरिफ लग सकता है। यह छूट अमेरिकी उपभोक्ताओं को दवा कीमतों में वृद्धि से बचाती है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर्स
लैपटॉप, डेस्कटॉप, सेमीकंडक्टर्स आदि को छूट दी गई है। इसके अलावा स्मार्टफोन्स, कंप्यूटर्स, मेमोरी, चिप्स, फ्लैश ड्राइव्स और इंटीग्रेटेड सर्किटस शामिल हैं। भारत से $10.6 अरब का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात प्रभावित नहीं होगा। इसका कारण अमेरिका का इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन एशिया (चीन, भारत, ताइवान) पर निर्भर है और तत्काल उत्पादन शिफ्ट असंभव है। हालांकि ट्रंप ने कहा है कि सेमीकंडक्टर पर अलग जांच के बाद नए टैरिफ आ सकते हैं।
एनर्जी और पेट्रोलियम उत्पाद (तेल, गैस, बिजली)
कच्चे तेल, पेट्रोलियम डेरेवेटकव्स और बिजली उत्पादों पर सौ फीसदी छूट है। भारत के $5-7 अरब के पेट्रोलियम निर्यात को राहत मिली। कारण अमेरिकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए आयात जरूरी और ट्रंप क एनर्जी इंडिपेंडेंस नीति इनकी रक्षा करती है।
तांबा, लकड़ी और डेरिवेटिव्स
काष्ठ, लकड़ी के उत्पाद और डेरिवेटिव्स पूरी तरह मुक्त है। कारण अमेरिका में निर्माण उद्योग इन पर निर्भर है। कच्चा तांबा 100% छूट प्राप्त, हालांकि 1 अगस्त 2025 ये 50% टैरिफ की घोषणा हुई लेकिन रॉ मैटेरियल्स को छूट दी गई क्योंकि इलेक्ट्रिकल और निर्माण क्षेत्र के लिए जरूरी।
क्रिटिकल मिनरल्स और केमिकल्स
दुर्लभ पृथ्वी तत्व, केमिकल्स और मिनरल्स पर छूट जो अमेरिकी टेक और डिफेंस उद्योग के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत के $ 5.7 अरब के रसायन निर्यात को फायदा है।
भारत के दो कट्टर दुश्मनों को शह दे रहे डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपित का दूसरी बार पदभार ग्रहण करने के साथ डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ वार छेड़कर दुनिया भर में उथल-पुथल मचा दी है। लेकिन ट्रंप के इस टैरिफ से पाकिस्तान के हाथ खजाना लग गया है। यह खजाना कोई और नहीं बल्कि बासमती चावल है। ट्रंप के टैरिपध् के कारण भारत के व्यापारी खासकर वासमती चावल की खेती करने वाले किसान और उसे बाहर भेजने वाले लोग बहुत परेशान है। ट्रंप का ये फैसला ऐसे समय पर आया है जब पहले से ही बासमती चावल के दाम गिर रहे हैं।
पाकिस्तान को फायदा
ट्रंप के इस फैसले से पाकिस्तान को फायदा हो रहा है। भारत पर 50 फीसदी टैक्स लगने से पाकिस्तान को अमेरिकी बाजार में आगे बढ़ने का मौका मिल गया है। पाकिस्तान पर सिर्फ 19% टैक्स लगा है। इस वजह से पाकिस्तान को बासमती चावल बेचने में 31% का फायदा होगा क्योंकि भारत का बासमती चावल अमेरिकी ग्राहकों को 31 प्रतिशत महंगा पड़ेगा।
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अमेरिका के रूख में ट्विस्ट
इस बीच अमेरिका के रूख में अचानक बड़ा ट्विस्ट आया है। अमेरिका ने भारत के साथ ट्रेड डील हो जाने का साफ संकेत दिया है। उसने यह भी कहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। अमेरिकी वित्तमंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि भारत और अमेरिका अंत में एक समझौता कर लेंगे। तनाव के बावजूद वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच बातचीत जारी है। दोनों पक्ष इसका समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं।



