पीएम गति शक्ति: तीन रेल परियोजनाओं को हरी झंडी

प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 103वीं बैठक में रेल मंत्रालय की तीन बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इनसे माल ढुलाई तेज होगी, भीड़भाड़ कम होगी और पूर्वी भारत के औद्योगिक क्षेत्रों को नया जीवन मिलेगा।

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत आज नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG) की 103वीं बैठक हुई। बैठक में रेल मंत्रालय की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया और इन्हें सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। ये परियोजनाएं मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी बढ़ाने, लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और अंतिम छोर तक बेहतर संपर्क देने के मकसद से बनाई गई हैं।

पहली परियोजना: बोकारो स्टील कॉरिडोर का दोहरीकरण और चौथी लाइन

पश्चिम बंगाल-झारखंड में बारबेंडा-डमरुघुटू के बीच तीसरी-चौथी लाइन और डमरुघुटू-बोकारो खंड में दोहरीकरण होगा। कुल लंबाई करीब 52 किलोमीटर होगी। यह कॉरिडोर बोकारो स्टील प्लांट, टाटा स्टील, डालमिया सीमेंट और एचपीसीएल जैसे बड़े उद्योगों के लिए जीवन रेखा है। नई लाइनों से कोयला, स्टील और सीमेंट की ढुलाई तेज होगी, ट्रेनों की देरी कम होगी और क्षेत्र में नई फैक्ट्रियां लगाने की राह आसान होगी।

दूसरी परियोजना: गंगा पर नया पुल, जमालपुर-मुंगेर रेल लाइन दोगुनी

बिहार में जमालपुर-मुंगेर-सबदलपुर के बीच 15 किमी नई डबल लाइन बनेगी। इसमें गंगा नदी पर नया पुल और जमालपुर बाईपास लाइन भी शामिल है। परियोजना जुलाई 2030 तक पूरी होगी। इससे उत्तर बिहार और दक्षिण-पूर्व बिहार-झारखंड के बीच सीधा और तेज रेल संपर्क बनेगा। ITC मुंगेर प्लांट, भागलपुर हैंडलूम क्लस्टर, बरौनी रिफाइनरी, कहलगांव-कांति पावर प्लांट सबको फायदा होगा। साथ ही हजारों लोगों को निर्माण के दौरान और बाद में रोजगार मिलेगा।

तीसरी परियोजना: हावड़ा-खड़गपुर के बीच चौथी लाइन

पश्चिम बंगाल में संतरागाछी-पंसकुरा-खड़गपुर के बीच 111 किमी चौथी लाइन बनेगी (कुल परियोजना लंबाई 134 किमी)। यह देश के सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोर में से एक है। यहां रोज 115 यात्री ट्रेनें और लाखों टन कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, स्टील की ढुलाई होती है। चौथी लाइन बनने से माल गाड़ियों की रफ्तार बढ़ेगी, यात्री ट्रेनें समय पर चलेंगी और 11वें साल तक माल ढुलाई क्षमता 20 मिलियन टन से बढ़कर 28 मिलियन टन हो जाएगी।

आगे की राह

तीनों परियोजनाएं पीएम गति शक्ति के ‘संपूर्ण सरकार’ दृष्टिकोण को मजबूत करेंगी। इससे न सिर्फ रेल नेटवर्क मजबूत होगा बल्कि सड़क, बंदरगाह और औद्योगिक क्लस्टर आपस में बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। परिवहन लागत कम होने से भारतीय सामान विदेशी बाजारों में और सस्ता और प्रतिस्पर्धी बनेगा।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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