नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन इस बीच प्लैटिनम ने बाजार में अपनी चमक बिखेरी है। फेस्टिवल सीजन से पहले सोने की आसमान छूती कीमतों ने आम लोगों को परेशान कर दिया है। ऐसे में प्लैटिनम एक नया विकल्प बनकर उभरा है, जिसकी कीमतों में इस साल 70% की तेजी आई है। तुलना करें तो सोने में 51% और चांदी में 58% की वृद्धि हुई। हालांकि, प्लैटिनम अभी भी 2008 के अपने उच्चतम स्तर 2250 डॉलर प्रति औंस से 28% नीचे है। पिछले दो वर्षों (2023-2024) में इसकी कीमतों में 8% की गिरावट देखी गई थी, लेकिन 2025 में यह धातु बाजार में छा गई है।
कीमतों में तेजी के पीछे का कारण
प्लैटिनम की कीमतों में यह उछाल आपूर्ति में कमी और मांग में वृद्धि का परिणाम है। यह धातु न केवल आभूषण उद्योग में लोकप्रिय है, बल्कि ऑटोमोबाइल, पेट्रोकेमिकल, और हाइड्रोजन ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी इसका व्यापक उपयोग हो रहा है। खासकर ग्रीन टेक्नोलॉजी और वाहनों के कैटेलिटिक कन्वर्टर्स में इसकी 70% से अधिक खपत होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि खदानों से उत्पादन में कमी, खासकर दक्षिण अफ्रीका में खराब मौसम और तकनीकी समस्याओं के कारण, इसकी आपूर्ति प्रभावित हुई है। इससे बाजार में तनाव बढ़ा है, जिसने कीमतों को और ऊपर धकेला।
भविष्य में और बढ़ेगी कीमत?
विश्व प्लैटिनम निवेश परिषद के अनुसार, 2025 में प्लैटिनम की आपूर्ति में 8,50,000 औंस की कमी हो सकती है। यह लगातार तीसरा साल है जब आपूर्ति मांग से पीछे है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले कुछ वर्षों में मांग और मजबूत होगी, क्योंकि ग्रीन टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर में इसकी जरूरत बढ़ रही है। निवेश सलाहकारों का कहना है कि सोने की तुलना में प्लैटिनम अभी भी किफायती है, जिससे यह आभूषण और निवेश के लिए आकर्षक विकल्प बन रहा है।
निवेशकों के लिए नया मौका
प्लैटिनम की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। इसकी कमी और बढ़ती मांग इसे भविष्य का आकर्षक निवेश बना रही है। सोने-चांदी की चमक के बीच प्लैटिनम अपनी अलग पहचान बना रहा है।



