नई दिल्ली: 2032 तक देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता (Nuclear Energy Capacity) 22 गीगावॉट होगी। शनिवार को संसद भवन में हुई बैठक में चालू और आगामी परियोजनाओं से 14 गीगावॉट बढ़ाकर क्षमता को 8.8 गीगावॉट से 22 गीगावॉट तक बढ़ाने के रोडमैप की समीक्षा की। इस बैठक में विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर और परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा मिशन पर चर्चा की।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) कार्यक्रम के प्रति उद्योगों की ओर से मिली मजबूत और जीवंत प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया। इसके परिणामस्वरूप व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2025 तक बढ़ा दी गई। अप्रैल में आयोजित चौथी सलाहकार समिति की बैठक के परिणामों का समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके, इसके लिए तेजी से काम किया गया।
तैयार किए गए सुझाव
इस बैठक में प्रमुख सुझावों की रूपरेखा तैयार की गई। इनमें नियामक मंजूरी को सुव्यवस्थित करना, प्रलेखन (दस्तावेजीकरण) को मानकीकृत करना, प्रसंस्करण समय सीमा को अनुकूलित करना, सामान्य प्रस्तावों पर जोर देना, लाइसेंसों को समन्वित करना और तकनीकी उन्नयन और क्षमता निर्माण में निवेश करना शामिल हैं। विद्युत मंत्री ने समय-सीमा का पालन करने और स्थापित रोडमैप के अनुसार परियोजनाओं में तेजी लाने के महत्व पर बल दिया।
2070 तक नेट-शून्य का है लक्ष्य
भारत ने वर्ष 2047 तक ऊर्जा के क्षेत्र में स्वतंत्रता अर्थात आत्मनिर्भरता और वर्ष 2070 तक नेट-शून्य के लक्ष्य की घोषणा की है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में ग्रीन हाइड्रोजन द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की आशा है।
2030 का टारगेट
2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करना है, जिसे लगभग 125 गीगावाट की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वृद्धि द्वारा समर्थित किया जाएगा। इसके लिए 19,744 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित है।
न्यूक्लियर एनर्जी मिशन
जीरो कार्बन एमिशन (शून्य कार्बन उत्सर्जन) की राह पर निकलने भारत ने अहम पड़ाव हासिल किया है। देश में परमाणु उर्जा मिशन (Nuclear Energy Mission) का ऐलान किया गया है। इससे कम से कम कार्बन उत्सर्जन के साथ परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन बढ़ेगा। बेस लोड आवश्यकता भी पूरी होगी को पूरा करना है, जो इस समय जीवाश्म ईंधन वाले बिजली प्लांटों से हैं।



