नई दिल्ली: देश की जल सुरक्षा और बांधों की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए ‘राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति’ (NCDS) की 11वीं बैठक डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित की गई। केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष श्री अनुपम प्रसाद की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बांध सुरक्षा अधिनियम-2021 के प्रभावी क्रियान्वयन और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए गए।
सुरक्षा मानकों के लिए विशेषज्ञों का मंथन
बैठक में NDMA, CWC, IMD, GSI और NRSC जैसे प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों सहित उत्तर प्रदेश, असम, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे 7 राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर डॉ. योगेंद्र सिंह जैसे विशेषज्ञों ने बांधों की विफलता से उत्पन्न होने वाली आपदाओं को रोकने के लिए तकनीकी नवाचारों पर सुझाव दिए।
व्यापक बांध सुरक्षा मूल्यांकन (CDSE) पर जोर
बैठक का मुख्य एजेंडा बांधों का ‘व्यापक सुरक्षा मूल्यांकन’ और ‘जोखिम मूल्यांकन’ (SQRA और QRA) रहा।
- नई विशेषज्ञ समिति: समिति ने स्तर-2 और स्तर-3 के जोखिम मूल्यांकन के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्णय लिया है।
- SOP में संशोधन: बांध सुरक्षा मूल्यांकन की रिपोर्ट को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए इसके मसौदा ढांचे में संशोधन की सलाह दी गई।
- भूकंपीय उपकरण: बांधों पर भूकंपीय उपकरणों के अनुकूलन पर चर्चा हुई और मौजूदा विनियमों को जारी रखने का फैसला लिया गया।
उत्तर प्रदेश के ‘चंद्रप्रभा बांध’ की सराहना
समिति ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चंदौली स्थित चंद्रप्रभा बांध में रिसाव रोकने की दिशा में किए गए प्रयासों की विशेष सराहना की। इसे अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण के रूप में देखा गया कि कैसे समय रहते तकनीकी हस्तक्षेप से बांध की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
अधिनियम का पालन और क्षमता निर्माण
अध्यक्ष श्री अनुपम प्रसाद ने स्पष्ट किया कि बांध सुरक्षा अधिनियम का सफल कार्यान्वयन हितधारकों के बीच तकनीकी उत्कृष्टता और प्रभावी सहयोग पर निर्भर करता है। उन्होंने बांध स्वामित्व एजेंसियों में ‘इन-हाउस’ क्षमता निर्माण की कमी को दूर करने के लिए एक व्यापक कार्य योजना बनाने पर जोर दिया।
प्रमुख निर्णय और भविष्य की राह
- जलाशय भराव योजना: प्रारंभिक पूर्व-भराव योजना को और अधिक तकनीकी रूप से मजबूत किया जाएगा।
- समन्वय: केंद्र और राज्यों के बीच बांध सुरक्षा दायित्वों के अनुपालन के लिए निकट समन्वय स्थापित किया जाएगा।
- दस्तावेज मूल्यांकन: गैर-संरचनात्मक दस्तावेजों के मूल्यांकन के लिए राज्य स्तर पर विशेषज्ञ समितियां गठित की जाएंगी।
बैठक का समापन बांधों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के संकल्प के साथ हुआ, जिससे देश की सिंचाई, बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण प्रणालियों को मजबूती मिलेगी।



