अँधेरे समय में उम्मीद का चिराग: मुंडेर पर रोशनी की गजलीय संवेदना

Share This Article:

“मैं रौशनी पे जिंदगी का नाम लिख के आ गया उसे मिटा मिटा के ये सियाह रात थक गई।” वरिष्ठ शायर नसीम अंसारी के एक शेर से गजल पर बात करते हुए इस गजल संग्रह पर लिख रहा हूं।गजल एक काव्य-विधा है जिसमें प्रत्येक शेर अपने आप में पूर्ण होता है, पर बहर, काफिया और रदीफ के माध्यम से एक शिल्पगत अनुशासन में बंधा रहता है।

परंपरागत गजल में प्रेम, विरह, आध्यात्मिकता और सूफियाना भाव प्रमुख रहे हैं। समकालीन गजल इसी शास्त्रीय संरचना को सुरक्षित रखते हुए अपने समय की सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय चिंताओं को अभिव्यक्त करती है। इसमें सत्ता, असमानता, स्त्री–अनुभव, हाशिए की पीड़ा और प्रतिरोध के स्वर मुखर होते हैं। इस प्रकार समकालीन गजल संवेदना और चेतना—दोनों का काव्यात्मक दस्तावेज बनती है।

समकालीन हिंदी गजल के परिदृश्य में मुंडेर पर रोशनी रूबी भूषण का एक संवेदनशील और विचारोत्तेजक प्रवेश है। यह संग्रह न केवल भावनात्मक स्तर पर पाठक से संवाद करता है, बल्कि सामाजिक, नैतिक और मानवीय सरोकारों को भी शालीन प्रतिरोध के स्वर में प्रस्तुत करता है।

‘मुंडेर’ और ‘रोशनी’—दोनों प्रतीक यहां बहुत अर्थगर्भी हैं; अँधेरे समय में भी उम्मीद का दीया जलाए रखने की जिद इस संग्रह की केंद्रीय चेतना बन जाती है।

रूबी भूषण मूलतः कथाकार रही हैं, जिसका प्रभाव उनकी ग़ज़लों में स्पष्ट दिखाई देता है। उनके शेरों में केवल भाव नहीं, बल्कि स्थिति होती है—एक दृश्य, एक अनुभव, एक मनःस्थिति। उदाहरण के लिए—”इधर-उधर की हवाओं से कौन डरता है
मेरा चराग अँधेरों से बात करता है”

यह शेर केवल आत्मविश्वास का उद्घोष नहीं, बल्कि समकालीन भय, असुरक्षा और प्रतिरोध की सशक्त प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है।

इस संग्रह की भाषा इसकी सबसे बड़ी ताक़त है। हिंदी–उर्दू का संतुलित, सहज और संप्रेषणीय प्रयोग पाठक को कहीं भी बोझिलता का अनुभव नहीं होने देता। शब्द आडंबर नहीं रचते, बल्कि अर्थ को खोलते हैं।

जैसे—
” लोग बस आईना दिखाते हैं
ख़ुद का चेहरा मगर छुपाते हैं।”

यहां सामाजिक पाखंड पर सीधा लेकिन सधा हुआ व्यंग्य है, जो बिना आक्रोश के गहरी चोट करता है।

रूबी भूषण की गजलों में प्रेम एक प्रमुख विषय है, किंतु यह प्रेम केवल रूमान तक सीमित नहीं रहता। वह जीवन-संघर्ष, स्मृति, विरह और आत्मसम्मान से जुड़कर व्यापक मानवीय अनुभव बन जाता है—
“गजल में बात करूँ और तेरा नाम आये
हुनर यही तो मेरी जिंदगी के काम आये”
यहां प्रेम सृजनात्मक ऊर्जा का स्रोत बनता है, जो कवयित्री को जीवन से जोड़ता है।

संग्रह की एक उल्लेखनीय विशेषता इसका सामाजिक और राजनीतिक विवेक है। सत्ता, व्यवस्था और नैतिक पतन पर कवयित्री सजग दृष्टि रखती हैं—
” हर तरफ है चीख का वातावरण
यह सियासत जाने कैसे सो रही”
यह शेर समकालीन लोकतांत्रिक विडंबनाओं पर तीखी टिप्पणी है, जो पाठक को असहज प्रश्नों से रूबरू कराता है।

स्त्री–अनुभव इस संग्रह का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। यहाँ स्त्री न तो केवल पीड़िता है, न ही नारेबाज विद्रोही—वह सोचती है, सहती है, सवाल उठाती है और उम्मीद भी करती है—
” बेबसी में कटा रह गया
कुछ न कुछ तो बचा रह गया”
यह पंक्ति स्त्री–जीवन के संघर्ष और आत्मसंरक्षण—दोनों का सूक्ष्म संकेत देती है।

शिल्प की दृष्टि से संग्रह में बहर, काफिया और रदीफ के प्रति सजगता दिखाई देती है। विशेषकर छोटी बहरों में कही गई गजलें प्रभावशाली बन पड़ी हैं—
” क्या कहना है
चुप रहना है”
यह संक्षिप्तता ही यहां अर्थ की सघनता रचती है। हालाँकि, कुछ स्थानों पर भावों की पुनरावृत्ति और कुछ शेरों में अपेक्षित कसाव की कमी महसूस होती है, किंतु यह प्रथम गजल-संग्रह की स्वाभाविक सीमा है। समग्र रूप में ये कमियाँ संग्रह की संवेदनशीलता और ईमानदारी को प्रभावित नहीं करतीं।

निष्कर्ष

मुंडेर पर रोशनी एक ऐसा गजल-संग्रह है जो अंधेरे समय में भी उजास की संभावना तलाशता है। डॉ. रूबी भूषण की गजलें सादगी, संवेदना और सामाजिक चेतना का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। यह संग्रह न केवल ग़ज़ल-प्रेमियों के लिए, बल्कि समकालीन हिंदी कविता के पाठकों के लिए भी पठनीय और संग्रहणीय है।

समीक्षक:

डॉ.संतोष पटेल

DISHA ROJHE

disharojhe007@gmail.com

I am a detail-oriented Content Writer with professional experience in digital and broadcast news media. I have worked with reputed platforms including News18, Live India, and 8PM News, where I contributed as a content writer, crafting engaging, informative, and audience-focused content.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.