नई दिल्ली: दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने सोमवार को भलस्वा लैंडफिल साइट का दौरा कर नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे बायोमाइनिंग कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कहा, पिछले एक वर्ष में काम में प्रगति जरूर हुई है, लेकिन लक्ष्य अभी दूर है और इसके लिए और तेज़, तकनीक-आधारित और व्यवस्थित प्रयास जरूरी हैं।
भलस्वा साइट पर पहुंचकर उपराज्यपाल ने ट्रॉमलिंग मशीनों के जरिए चल रही कचरे की छंटाई प्रक्रिया को करीब से देखा। अधिकारियों ने बताया कि यहां मिश्रित नगर ठोस कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर आरडीएफ, पुनर्चक्रण योग्य सामग्री और निर्माण में उपयोग होने वाले मलबे में बदला जा रहा है। इसी प्रक्रिया से कचरे के पहाड़ को धीरे-धीरे समतल करने का काम किया जा रहा है।
आरडीएफ, रिसाइक्लिंग और निर्माण सामग्री में बदल रहा कचरा
निरीक्षण के दौरान उपराज्यपाल ने साइट पर चल रही ट्रॉमलिंग मशीनों का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि मिश्रित कचरे को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर आरडीएफ, पुनर्चक्रण योग्य सामग्री और निर्माण कार्य में उपयोग होने वाले मलबे में बदला जा रहा है। इससे कचरे के पहाड़ को समतल करने की प्रक्रिया तेज हो रही है।
लीगेसी वेस्ट के साथ नए कचरे की चुनौती
निरीक्षण के दौरान उपराज्यपाल ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सिर्फ वर्षों से जमा लीगेसी वेस्ट ही नहीं, बल्कि रोजाना उत्पन्न हो रहे नए कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि स्रोत स्तर पर ही कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित किया जाए तो पूरी प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी हो सकती है। इसके लिए उन्होंने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) और मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन (एमटीए) की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
श्रमिकों से संवाद और सुरक्षा के दिए निर्देश
दौरे के दौरान उपराज्यपाल ने साइट पर कार्यरत श्रमिकों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा और कार्यस्थल सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाए और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
आग की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी उपाए किए जाएं
गर्मी के मौसम को देखते हुए उपराज्यपाल ने नगर निगम को सख्त निर्देश दिए कि लैंडफिल साइटों पर आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल और प्रभावी उपाय किए जाएं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि आसपास के इलाकों के लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी पैदा करती हैं।
वैश्विक तकनीक और तेजी से काम पर जोर
उन्होंने नगर निगम से कहा कि कचरा प्रबंधन में दुनिया भर में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय मानकों का अध्ययन कर उन्हें लागू किया जाए ताकि बायोमाइनिंग और कचरा निस्तारण की गति बढ़ाई जा सके।
लक्ष्य अभी दूर है, तकनीक-आधारित प्रयास जरूरी
अधिकारियों ने जानकारी दी कि भलस्वा लैंडफिल, जो लगभग 70 एकड़ क्षेत्र में फैला है, वहां करोड़ों टन कचरा वर्षों से जमा है। अब तक बड़ी मात्रा में बायोमाइनिंग की जा चुकी है, लेकिन रोजाना आने वाले नए कचरे के कारण चुनौती लगातार बनी हुई है। इसी वजह से अतिरिक्त ट्रॉमलिंग मशीनें लगाने की प्रक्रिया भी जारी है।
उपराज्यपाल ने कहा कि यदि प्रशासन, तकनीक और नागरिक भागीदारी तीनों मिलकर काम करें तो दिल्ली के “कचरे के पहाड़” को पूरी तरह समतल करना संभव है, लेकिन इसके लिए निरंतरता और तेज गति दोनों जरूरी हैं।



