नई दिल्ली: मानसून सत्र के आखिरी दिन 21 जुलाई को बिजली उत्पादन, एयरोस्पेस सेक्टर के स्टार्टअप, परमाणु सुरक्षा और हाई लेवल के रेडियोएक्टिव से जुड़े सवालों के जवाब केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दिए। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने की योजनाओं या अन्य घोषणाओं की जानकारी दी। इसके अलावा परमाणु सुरक्षा के लिए नए कानून की जानकारी दी।
रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर
जितेंद्र सिंह ने बताया कि फिलहाल भाविनी 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर को चालू कर रही है। वर्तमान प्रगति के अनुसार पीएफबीआर की क्रिटिकलिटी प्राप्त करने की अपेक्षित समय-सीमा मार्च 2026 तक है और पूर्ण बिजली उत्पादन के लिए अपेक्षित समय-सीमा दिसंबर 2026 तक है। बिजली उत्पादन प्राप्त करने पर पीएफबीआर राष्ट्रीय ग्रिड में देश के परमाणु ऊर्जा योगदान में 500 मेगावाट क्षमता जोड़ देगा।
पीएफबीआर भारत के सीमित यूरेनियम संसाधनों का इष्टतम उपयोग करने और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा हेतु अपने विशाल थोरियम भंडारों का दोहन करने के लिए एक बंद ईंधन चक्र व्यवस्था का पालन करता है। अपशिष्ट परमाणु ईंधन (एसएनएफ) से विखंडनीय और उपजाऊ सामग्री को अपशिष्ट के रूप में निपटाने के बजाय उसकी पुनर्प्राप्ति और पुनर्चक्रण शामिल है।
परमाणु सुरक्षा के लिए नया कानून बनाना
बजट 2025 की घोषणा के साथ सरकार ने विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन की घोषणा की है। इसमें 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा की परिकल्पना की गई है। परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व (सीएलएनडी) अधिनियम, 2010 में संशोधन करके निजी क्षेत्र की भागीदारी की अनुमति दी गई है। भारत में असैन्य परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पूरी तरह से परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) के पास एईआरबी सरकार की ओर से नामित प्राधिकरण है जिसे इन सुविधाओं के संचालन को विनियमित करने और निगरानी करने का अधिकार दिया गया है।
विनियमन को सरल बनाने तथा एकसमान मानकों को बढ़ावा देने के लिए एईआरबी ने सुरक्षा कोड, मार्गदर्शिका और मानकों का एक व्यापक सेट विकसित किया है, जिसका पालन सभी ऑपरेटरों के लिए आवश्यक है। इन परमाणु प्रतिष्ठानों को कानूनी रूप से संचालित करने के लिए, प्रतिष्ठानों को एईआरबी से आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करना होगा। ये लाइसेंस निर्धारित सुरक्षा मानकों के सख्त पालन पर निर्भर हैं।
अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप
अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं/प्रोत्साहनों/सहायता की घोषणा/कार्यान्वित की गई है। इसमें निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 1000 करोड़ रुपये के अंतरिक्ष वेंचर कैपिटल (वीसी) फंड की घोषणा की गई है। स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करने के लिए विभेदक मूल्य निर्धारण नीति। प्रौद्योगिकी विकास और व्यावसायीकरण को सक्षम बनाने के लिए 500 करोड़ रुपये का टीएएफ अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों और अनुप्रयोगों को विकसित करने को सीड फंड योजना।
निजी क्षेत्रों को सक्षम बनाने और उनका मार्गदर्शन करने के लिए सुविधा प्रदान करना, तकनीकी केंद्र स्थापित करना और मार्गदर्शन प्रदान करना। इसरो से निजी क्षेत्र में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को सक्षम बनाना। सार्वजनिक-निजी भागीदारी के अंतर्गत पृथ्वी अवलोकन प्रणाली की स्थापना।
रेडियोएक्टिव वेस्ट
न्यूक्लियर पावर प्लांट (एनपीपी) को इस तरह डिज़ाइन और संचालित किया जाता है कि रेडियोएक्टिव वेस्ट कम निकले। उच्च-स्तरीय रेडियोधर्मी अपशिष्ट को विट्रीफिकेशन के जरिये निष्क्रिय काँच के मैट्रिक्स में रखा जाता है फिर अंतरिम भंडारण के लिए ठोस भंडारण निगरानी सुविधाओं में संग्रहित किया जाता है । यह अभ्यास अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निर्देशों के हिसाब से होता है। इस वेस्ट में कमी लाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।
बंद ईंधन चक्रः रिएक्टरों से निकले हुए ईंधन को पानी के भीतर बड़े कुंडों में संग्रहित किया जाता है, जिन्हें व्ययित ईंधन भंडारण बे (एसएफएसबी) कहा जाता है। ये सभी एनपीपी में होते हैं। यह एक अंतरिम भंडारण सुविधा है जहा व्ययित ईंधन के बंडलों को पुनर्प्रसंस्करण संयंत्रों में पुनर्प्रसंस्करण के लिए स्थानांतरित करने से पहले एक निश्चित अवधि के लिए ठंडा किया जाता है।
एसएफएसबीः भूकंप-प्रतिरोधी संरचना है जिसमें जल पुनःपरिसंचरण और निस्पंदन प्रणाली है। खर्च किए गए ईंधन के बंडलों को भूकंपरोधी रैक में संग्रहित किया जाता है जिन्हें कुंड के तल पर रखा जाता है। जैविक परिरक्षण और शीतलन प्रदान करने के लिए खर्च किए गए ईंधन के बंडलों के ऊपर पर्याप्त जल स्तर बनाए रखा जाता है।
प्रयुक्त ईंधन को विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए रिएक्टर से दूर (एएफआर) सुविधाओं में संग्रहित किया जाता है। एएफआर प्रयुक्त ईंधन भंडारण सुविधा, क्षमता के मामले में, एसएफएसबी के समान ही है। इसका डिज़ाइन यह सुनिश्चित करता है कि इस सुविधा का कर्मियों, जनता और पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
ऐसे होता है निपटानः एनपीपी में उनके संचालन और रखरखाव के दौरान उत्पन्न रेडियोधर्मी अपशिष्ट निम्न और मध्यम स्तर के होते हैं। इन्हें उपचारित, सांद्रित, संहत और सीमेंट जैसे ठोस पदार्थों में स्थिर किया जाता है। प्रबलित कंक्रीट की खाइयों और टाइल होल जैसी विशेष रूप से निर्मित संरचनाओं में निपटाया जाता है । निपटान सुविधाओं पर योजनाबद्ध तरीके से स्थापित बोरवेल की सहायता से निरंतर निगरानी रखी जाती है और निपटाए गए अपशिष्ट में मौजूद रेडियोधर्मिता के प्रभावी परिसीमन की पुष्टि के लिए भूमिगत जल और मिट्टी के नमूनों की नियमित निगरानी की जाती है। पिछले पांच वर्षों के दौरान परमाणु सुविधाओं के कारण रेडियोधर्मी संदूषण का कोई मामला सामने नहीं आया है।



