नई दिल्ली। अब घने कोहरे, भारी बारिश या खराब विजिबिलिटी के दौरान भी देश के हवाई अड्डों पर विमानों की सुरक्षित लैंडिंग बेहद आसान हो जाएगी। विमानन नियामक DGCA की देखरेख में भारत में पहली बार किसी बड़े कॉमर्शियल जेट को बिना जमीनी रेडियो सिग्नल के, सीधे सैटेलाइट सिग्नल्स की मदद से सुरक्षित उतारने का ऐतिहासिक ट्रायल पूरा कर लिया गया है।
यह कामयाबी इंडिगो एयरलाइंस के एयरबस A320 विमान ने भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम ‘गगन’ (GAGAN) का इस्तेमाल करके हासिल की है। हालांकि, इंडिगो ने साल 2022 में छोटे एटीआर (ATR) विमानों पर इसका परीक्षण किया था, लेकिन बड़े कॉमर्शियल जेट के साथ देश में यह पहला सफल ट्रायल है।
क्या है स्वदेशी ‘गगन’ सिस्टम?
गगन का पूरा नाम ‘जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन’ (GPS Aided GEO Augmented Navigation) है। यह भारत का अपना सैटेलाइट-बेस्ड ऑगमेंटेशन सिस्टम (SBAS) है। इसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) ने संयुक्त रूप से मिलकर तैयार किया है।
‘गगन’ भारत के ‘नाविक’ (NavIC) या अमेरिका के ‘जीपीएस’ (GPS) की तरह कोई स्वतंत्र नेविगेशन सिस्टम नहीं है जो सीधे लोकेशन बताता हो। बल्कि पहले से मौजूद GPS सिग्नल्स की कमियों और उसमें होने वाली गलतियों को ठीक करके उन्हें विमानों के लिए और ज्यादा सटीक, शुद्ध व भरोसेमंद बनाता है।
पायलट को कैसे मिलता है सटीक रास्ता?
आमतौर पर बड़े और प्रमुख एयरपोर्ट्स पर विमानों को सुरक्षित रनवे पर उतारने के लिए इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) का इस्तेमाल किया जाता है। इसके तहत रनवे के आसपास बेहद महंगे ग्राउंड-बेस्ड (जमीन पर लगे) उपकरण और रेडियो बीम लगाए जाते हैं, जो पायलट को रनवे की सीध और सटीक रास्ता बताते हैं। छोटे एयरपोर्ट्स पर यह सिस्टम लगाना काफी खर्चीला होता है।
इसके उलट 27 जून को हुए इस ऐतिहासिक टेस्ट में सैटेलाइट-बेस्ड लैंडिंग सिस्टम (SLS) का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें जमीन पर भारी-भरकम और महंगे इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं होती। आसमान में चक्कर काट रहे सैटेलाइट्स सीधे विमान के कंप्यूटर को गाइड करते हैं, जिससे पायलट खराब से खराब मौसम में भी बिना किसी जमीनी मदद के प्लेन को सटीक जगह लैंड करा सकता है।



