पिछले बारह वर्षों में तकनीक और इनोवेशन के दम पर प्रयोगशालाओं से निकलकर आम नागरिकों के जीवन का हिस्सा बना साइंस ।
भारत का विज्ञान, तकनीक और इनोवेशन परिदृश्य आज एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बदलाव का गवाह बन रहा है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विज्ञान अब सिर्फ प्रयोगशालाओं की फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के आम नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने और विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने का मुख्य आधार बन चुका है।
पिछले बारह वर्षों के दौरान देश ने न केवल रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि कई क्षेत्रों में दुनिया का नेतृत्व भी किया है। आइए डालते हैं इन बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों पर एक नज़र:
बायोइकॉनमी (Bioeconomy) में ऐतिहासिक उछाल
- विशाल और अभूतपूर्व विस्तार: पिछले बारह वर्षों में भारत की बायोइकॉनमी में लगभग बीस गुना की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसने वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को बेहद मजबूत किया है।
- भविष्य का महत्वाकांक्षी लक्ष्य: बायो-ई-थ्री (BioE3) जैसी प्रगतिशील नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के दम पर आने वाले कुछ ही सालों में इसे तीन सौ बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
- सस्ता और उन्नत हेल्थकेयर: भारत आज देश के साथ-साथ वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए सस्ती कार-टी (CAR-T) सेल थेरेपी, अगली पीढ़ी के एंटीबायोटिक्स, जीनोमिक्स और प्रिसिजन मेडिसिन जैसे क्षेत्रों में एक ग्लोबल हब बनकर उभरा है।
अंतरिक्ष और परमाणु क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार
- चंद्रयान की वैश्विक गूंज: चंद्रमा के अज्ञात और दुर्गम दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना, जिसने वैश्विक स्तर पर हमारी तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाया।
- स्पेस स्टार्टअप्स की बाढ़: अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए ऐतिहासिक नीतिगत सुधारों और इसे निजी भागीदारी के लिए खोलने का परिणाम है कि पहले उंगलियों पर गिने जाने वाले स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या आज बढ़कर सैकड़ों में पहुंच चुकी है।
- भविष्य के बड़े संकल्प: भारत अब तेजी से अपने अगले मिशनों की ओर बढ़ रहा है, जिसके तहत भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना करने और चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री को उतारने की ठोस तैयारियां चल रही हैं।
- परमाणु ऊर्जा में निजी क्षेत्र: परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलना एक बड़ा नीतिगत सुधार साबित हुआ है, जो देश की स्वच्छ ऊर्जा आवश्यकताओं और क्षमता निर्माण को नई गति दे रहा है।
मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव
- मिशन मौसम (Mission Mausam): देश के मौसम परिचालन रडार नेटवर्क में भारी विस्तार किया गया है, जिससे देश के कोने-कोने तक मौसम की सटीक निगरानी संभव हो सकी है।
- व्यापक और सटीक कवरेज: मौसम पूर्वानुमान का दायरा चंद सौ शहरों से बढ़ाकर अब हजारों स्थानों तक कर दिया गया है, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों को भी जोड़ा जा चुका है।
- नाउकास्ट सेवा: अत्यधिक स्थानीयकृत और अल्पावधि के पूर्वानुमानों से किसानों, आम नागरिकों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को सटीक समय पर जानकारी मिल रही है, जिससे देश की आपदा सहनशीलता बेहद मजबूत हुई है।
प्रयोगशाला से जमीन तक: स्वदेशी और सस्टेनेबल तकनीक
- अरोमा मिशन (Aroma Mission): इस अनूठे मिशन ने विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों में लैवेंडर जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती को बढ़ावा देकर हजारों किसानों की आजीविका को पूरी तरह बदल दिया है।
- स्टील स्लैग रोड तकनीक: औद्योगिक कचरे को राष्ट्रीय संसाधन में बदलते हुए बेहद टिकाऊ, मजबूत और कम लागत वाली सड़कों का निर्माण किया जा रहा है, जिसे देश भर में व्यापक रूप से अपनाया जा रहा है।
- डीप ओशन मिशन: गहरे समुद्र के रहस्यों और बहुमूल्य संसाधनों को खंगालने के लिए ‘मत्स्य’ और ‘वराह’ जैसी स्वदेशी गहरे समुद्र की तकनीकों का विकास और तैनाती की जा रही है।
मुख्य नीतिगत पहल जो बनीं इस बदलाव का आधार:
- अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF): देश में शोध और उच्च स्तरीय अनुसंधान को नई दिशा देने के लिए।
- नेशनल क्वांटम मिशन और नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन: भविष्य की अत्याधुनिक तकनीकों में भारत को अग्रणी बनाने के लिए।
- राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति: मैपिंग और डेटा आधारित गवर्नेंस को सुदृढ़ करने के लिए।
निष्कर्ष
आज सरकार का लगभग हर प्रमुख फ्लैगशिप कार्यक्रम भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित तकनीकों से संचालित हो रहा है, जो संपूर्ण-सरकार (whole-of-government) दृष्टिकोण की सफलता को दर्शाता है। विज्ञान और तकनीक की यह ताकत न केवल हमारी रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत कर रही है, बल्कि रोजगार के नए अवसर पैदा कर भारत को एक ज्ञान-आधारित वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित कर रही है।



