नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर बुधवार को आयोजित इंडो-श्रीलंका इकोनॉमिक कॉन्फ्रेंस 2026 में विशेष जोर दिया गया। सम्मेलन में दोनों देशों के राजनयिकों, नीति निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
वक्ताओं ने बताया
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारत और श्रीलंका का संबंध केवल भौगोलिक निकटता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सदियों पुराने सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और जनसंपर्क संबंधों पर आधारित है। भारत के लिए श्रीलंका हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय साझेदार है।
सम्मेलन में कहा गया कि भारत-श्रीलंका संबंध अब पारंपरिक व्यापारिक दायरे से आगे बढ़कर ऊर्जा, आधारभूत संरचना, डिजिटल कनेक्टिविटी, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित हो चुके हैं। भारत, श्रीलंका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों और निवेशकों में शामिल है। वक्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेबरहुड फर्स्ट नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्रीय विकास और स्थिरता के लिए श्रीलंका भारत का अहम सहयोगी है। दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग का सफल उदाहरण बताया गया।
भारत ने निभाई सहयोगी भूमिका
सम्मेलन में यह भी कहा गया कि भारत ने हमेशा श्रीलंका के विकास में भरोसेमंद मित्र और सहयोगी की भूमिका निभाई है। रेलवे आधुनिकीकरण, आवास, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और आपात सहायता जैसे क्षेत्रों में भारत का सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
स्किल डेवलपमेंट को मिलेगा जोर
विशेषज्ञों ने भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, समुद्री व्यापार, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, फार्मास्यूटिकल्स, शिक्षा, स्टार्टअप और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन में यह भी कहा गया कि आर्थिक साझेदारी तभी सफल मानी जाएगी जब उसका लाभ आम नागरिकों तक पहुंचे। रोजगार सृजन, बेहतर कनेक्टिविटी, उद्यमिता को बढ़ावा और लोगों के जीवन स्तर में सुधार दोनों देशों की साझा प्राथमिकता होनी चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच क्षेत्रीय सहयोग समय की आवश्यकता बन चुका है और भारत-श्रीलंका मिलकर हिंद महासागर क्षेत्र में स्थायी और मजबूत आर्थिक साझेदारी का उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं।



