नई दिल्ली: भारत दुनिया को हर्बल मेडिसिन की राह दिखा रहा है। कई देशों के विशेषज्ञ यहां ट्रेनिंग ले रहे हैं। हाल ही में WHO गुड मैन्युफेक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) पर हुई चार दिवसीय कार्यशाला में भूटान, थाईलैंड, श्रीलंका और नेपाल समेत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के 19 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसका आयोजन केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) और विश्व स्वास्थ्य संगठन – दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय (डब्ल्यूएचओ-एसईएआरओ) की ओर से मुंबई में किया गया।
ड्रग क्वॉलिटी पर जोर
इस कार्यक्रम ने वैश्विक हर्बल औषधि गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए सशक्त मंच मुहैया कराया। प्रतिभागियों को भारत के हर्बल औषधि और फार्मास्युटिकल क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों के नेतृत्व में 11 तकनीकी सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया।
इन विषयों पर हुई चर्चा
प्रमुख विषयों में डब्ल्यूएचओ-जीएमपी दिशानिर्देश, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणालियां, उत्तम हर्बल प्रसंस्करण पद्धतियां (जीएचपीपी), उत्तम कृषि एवं संग्रहण पद्धतियां (जीएसीपी), और आधुनिक गुणवत्ता नियंत्रण प्रोटोकॉल शामिल थे।
व्यावहारिक प्रशिक्षण के एक भाग के रूप में प्रतिनिधियों ने इमामी के डब्ल्यूएचओ-जीएमपी-प्रमाणित विनिर्माण संयंत्र और झंडू फाउंडेशन फॉर हेल्थकेयर फॉर्म्स का दौरा किया । जहां उन्हें गुणवत्ता संबंधी मानकों और फार्म-टू-फार्मा से जुड़ी उत्कृष्टता का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।
WHO के साथ काम कर रहा आयुष मंत्रालय
कार्यशाला ने डब्ल्यूएचओ-जीएमपी, जीएचपीपी और जीएसीपी दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन के लिए क्षेत्रीय सहयोग और क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम को चिह्नित किया। आयुष मंत्रालय, डब्ल्यूएचओ के साथ साझेदारी में भारत के हर्बल दवा मानकों को वैश्विक स्तर की सर्वोत्तम प्रणालियों के अनुरूप बनाने के प्रयास जारी है।
भारत की भूमिका
सीसीआरएएस के महानिदेशक, प्रो. रविनारायण आचार्य ने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक गुणवत्ता प्रोटोकॉल के साथ जोड़कर हर्बल दवाओं की वैश्विक स्वीकृति का समर्थन करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता पर बल दिया। डब्ल्यूएचओ-एसईएआरओ डॉ. पवन गोदटवार ने हर्बल दवाओं के लिए गुणवत्ता और सुरक्षा मानक स्थापित करने में भारत की अग्रणी भूमिका पर प्रकाश डाला।
2035 तक 19.81 बिलियन डॉलर होगा भारतीय बाजार
एमआरएफआर विश्लेषण के अनुसार, 2023 में भारत का हर्बल मेडिसिन बाज़ार 4.42 बिलियन अमेरिकी डॉलर अनुमानित था। 2024 में यह बढ़कर 5.01 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। 2035 तक इसके 19.81 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। पूर्वानुमान अवधि (2025 – 2035) के दौरान भारत हर्बल मेडिसिन बाज़ार की सीएजीआर (विकास दर) लगभग 13.32% रहने की उम्मीद है।
क्या है हर्बल मेडिसिन
हर्बल दवाइयां पौधों के हिस्सों, जैसे पत्तियों, जड़ों या फूलों से बने औषधीय उत्पाद होते हैं, जिनका उपयोग स्वास्थ्य को बनाए रखने या बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। हालांकि ये प्राकृतिक होती हैं, फिर भी इन्हें सावधानी से लेना चाहिए और डॉक्टर की सलाह के बिना इनका सेवन नहीं करना चाहिए, खासकर अगर आपकी कोई सर्जरी होने वाली है।



