दवा बनाने में आत्मनिर्भर हो रहा भारत, सरकार ने उठाए यह कदम

अनुप्रिया पटेल ने राज्य सभा में एक सवाल के जवाब देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने कई ऐसी पहलें की हैं, जिनसे फार्मा सेक्टर आत्म निर्भर हो रहा है।

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दिल्ली: देश का फार्मा मेडटेक सेक्टर में विकास की क्रांति लाने के लिए सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। इसमें 5,000 करोड़ रुपये के परिव्यय से फार्मा मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार (पीआरआईपी) योजना शुरू की गई है। इससे अनुसंधान और दवा की खोज, विकास और चिकित्सा उपकरणों के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास के उद्योग-अकादमिक संपर्क को बढ़ावा मिल सकेगा।

अनुसंधान के बुनियादी अवसंरचना स्‍थापित करने और चिह्नित क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए सात राष्ट्रीय औषधि शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों (एनआईपीईआर) में से प्रत्येक में उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) स्थापित किए गए हैं। इसके लिए 700 करोड़ रुपये की मदद दी गई है। यह जानकारी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी।

104 अनुसंधान परियोजनाओं को मंजूरी
ये केंद्र एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल दवा की खोज और विकास, चिकित्सा उपकरण, थोक दवाएं, प्रवाह रसायन विज्ञान और निरंतर उत्‍पादन, नवीन औषधि वितरण प्रणाली, फाइटोफार्मास्युटिकल्स (वनस्पति-आधारित दवा) और जैविक चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्रों में स्‍थापित किए गए हैं। अब तक इस योजना के तहत 104 अनुसंधान परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। दो पेटेंट दायर किए गए हैं। इस योजना में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचार परियोजनाएं शुरू करने के लिए शैक्षणिक जगत के साथ सहयोग सहित उद्योग और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए 4,250 करोड़ रुपये का परिव्यय शामिल है।

पीएलआई योजना
फार्मास्यूटिकल्स के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का उद्देश्य निवेश और उत्पादन बढ़ाना है। यह बायोफार्मास्यूटिकल्स जटिल जेनेरिक दवाओं, पेटेंट की गई दवाओं या पेटेंट समाप्ति के करीब पहुंच चुकी दवाओं, स्वप्रतिरक्षी रोगों की दवाओं, कैंसर-रोधी दवाओं आदि जैसी उच्च मूल्य वाली दवाओं के उत्पादन को प्रोत्साहित करती है। साथ ही बल्क ड्रग्स (सक्रिय दवा सामग्री) के लिए उत्पादन को भी प्रोत्साहित करती है। इस योजना से उत्पादों में निवेश और उत्पादन  बढ़ा है। 

मार्च 2025 तक, योजना की छह वर्षीय अवधि में 17,275 करोड़ रुपये के प्रतिबद्ध निवेश हुए। तीसरे वर्ष तक 37,306 करोड़ रुपये का संचयी निवेश हो चुका है, और 1,70,807 करोड़ रुपये के निर्यात सहित 2,66,528 करोड़ रुपये के स्वीकृत उत्पादों की कुल बिक्री हो चुकी है।

बल्क ड्रग्स पार्क योजना: बल्क ड्रग्स पार्क योजना के अंतर्गत तीन पार्क स्वीकृत किए गए हैं। आंध्र प्रदेश, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में राज्य कार्यान्वयन एजेंसियां विकसित कर रही हैं। इनकी कुल परियोजना लागत 6,300 करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें 1,000 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है। ये पार्क रियायती दर पर भूमि और बिजली, पानी, अपशिष्ट उपचार संयंत्र, भाप, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, गोदाम सुविधाओं से युक्‍त होंगे। तीनों राज्यों की राज्य कार्यान्वयन एजेंसियां तय पूंजी निवेश पर पूंजीगत सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, राज्य वस्तु एवं सेवा कर प्रतिपूर्ति, स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क में छूट सहित अन्‍य राजकोषीय प्रोत्साहन भी दे रही हैं।

फार्मास्युटिकल उद्योग को सहायताः इस योजना का उद्देश्य सामान्य सुविधाएं स्‍थापित करने के लिए फार्मास्युटिकल क्लस्टरों को वित्तीय सहायता प्रदान कर बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करना है। परीक्षण प्रयोगशालाओं, अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं, अपशिष्ट उपचार संयंत्रों और प्रशिक्षण केंद्रों में इससे मदद मिलती है जिससे साझा संसाधनों को विकसित करने और उनका लाभ उठाने में सक्षम बनाकर क्लस्टरों की दीर्घकालिक व्यवहार्यता और विकास किया जा सके। 

एपीआई-सीएफ के तहत फार्मास्युटिकल क्लस्टरों को कुल 139.33 करोड़ रुपये की अनुदान  परियोजनाओं को सामान्य सुविधाओं के निर्माण की मंजूरी दी गई है और वे निष्पादन के विभिन्न चरणों में हैं। इनके बनने से लगभग 1,300 मौजूदा फार्मास्युटिकल इकाइयों को सामान्य सुविधाएं मिलेंगी।

आरपीटीयूएएस : इस योजना का उद्देश्य 500 करोड़ रुपये से कम औसत कारोबार वाली छोटी और मध्यम दवा कंपनियों की उत्पादन सुविधाएं बढ़ाने में सहायता करना है ताकि वे औषधि नियम 1945 की संशोधित अनुसूची एम और विश्व स्वास्थ्य संगठन – उत्तम विनिर्माण पद्धतियों (डब्ल्यूएचओ-जीएमपी) के निर्दिष्ट मानक हासिल कर सकें और उनकी घरेलू और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हो। 

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजनाः सरकार ने सबको किफायती मूल्‍य पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना आरंभ की है। 30 जनू, 2025 तक देशभर में कुल 16,912 जनऔषधि केंद्र खोले गए हैं और प्रतिदिन औसतन लगभग 10 से 12 लाख लोग सस्‍ती दवाइयां खरीदते है। इस योजना में 2,110 दवाइयां और 315 सर्जिकल, चिकित्सा उपभोग्य वस्तुएं और उपकरण उपलब्‍ध कराए गए हैं।

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