नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में देश की सुरक्षा, हवाई कनेक्टिविटी और पर्यावरण को लेकर तीन ऐतिहासिक फैसले लिए गए। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने कुल 30,640 करोड़ रुपये के बड़े निवेश को हरी झंडी दे दी है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण ‘इमिग्रेशन, वीजा और विदेशी पंजीकरण एवं ट्रैकिंग’ योजना का तीसरा चरण है, जिससे भारत की सीमाओं पर सुरक्षा का चक्र अभेद्य हो जाएगा।
‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ से होगी वीजा और घुसपैठियों की ट्रैकिंग
सरकार ने अगले 5 वर्षों के लिए इमिग्रेशन सिस्टम को पूरी तरह स्मार्ट और सुरक्षित बनाने के लिए 1,800 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। अब एयरपोर्ट और इमिग्रेशन चेक पोस्ट पर चेहरा पहचानने वाली तकनीक (फेस रिकग्निशन) और आंखों की पुतली की स्कैनिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीक लागू होगी। घुसपैठ रोकने और संदिग्धों की पहचान के लिए एआई और मशीन लर्निंग का सहारा लिया जाएगा। यात्रियों की सुविधा के लिए ‘स्वयं सेवा कियोस्क’ लगाए जाएंगे, जिससे कागजी कार्रवाई कम होगी और इमिग्रेशन प्रक्रिया तेज होगी।
उड़ान योजना का विस्तार
छोटे शहरों को हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘उड़ान’ योजना को और आक्रामक तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है।
देश भर में 100 नए हवाई अड्डे विकसित किए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। साथ ही, पहाड़ी और दुर्गम इलाकों के लिए 200 नए हेलीपैड भी बनाए जाएंगे। एयरलाइंस को छोटे रूट पर उड़ानें चलाने के लिए सरकार 80 से 90 प्रतिशत तक ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ (वित्तीय मदद) देगी। इसके अलावा, हवाई अड्डा संचालकों को रखरखाव के लिए सालाना 3 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी।
नए एनडीसी प्लान को मंजूरी
भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करते हुए 2031 से 2035 के लिए नए जलवायु लक्ष्यों को मंजूरी दी है। भारत ने 2035 तक अपनी जीडीपी के मुकाबले कार्बन उत्सर्जन में 47 प्रतिशत की भारी कटौती करने का संकल्प लिया है। लक्ष्य रखा गया है कि देश की 60 प्रतिशत बिजली का उत्पादन गैर-जीवाश्म स्रोतों (जैसे सौर और पवन ऊर्जा) से किया जाएगा।
पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए 3.5 से 4 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की क्षमता विकसित की जाएगी, जिसके तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और हरित इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर होगा।



