नई दिल्ली: हाल के GST रैशनलाइजेशन ने कर्नाटक को समावेशी और टिकाऊ विकास की राह पर आगे बढ़ाया है। कॉफी, डेयरी, समुद्री उत्पादों, हस्तशिल्प, ड्रोन, और औद्योगिक सामानों पर टैक्स में कटौती से किसानों, कारीगरों और उद्यमियों को नया बल मिला है। कर्नाटक, जो भारत के 71% कॉफी उत्पादन का केंद्र है, अब इंस्टेंट कॉफी पर GST 18% से घटाकर 5% होने से 11-12% सस्ती होगी। यह छोटे कॉफी किसानों और निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाएगा। डेयरी क्षेत्र में 26 लाख किसानों को राहत मिली है, क्योंकि दूध और पनीर टैक्स-मुक्त हुए, जबकि घी और मक्खन पर टैक्स 12% से 5% कर दिया गया, जिससे ये 5-7% सस्ते होंगे।
तटीय अर्थव्यवस्था और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा
काजू, कॉयर और समुद्री उत्पादों पर GST 12% से 5% करने से कर्नाटक की 320 किमी लंबी तटरेखा पर मछुआरों और महिला-नेतृत्व वाले MSMEs को लाभ होगा। प्रसंस्कृत समुद्री भोजन, जैसे डिब्बाबंद टूना और जमे हुए झींगा, 6-7% सस्ता होगा, जिससे स्थानीय और निर्यात मांग बढ़ेगी। कॉयर उत्पादों पर कम टैक्स से पर्यावरण-अनुकूल सामान को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। यह कदम तटीय आजीविका और कुटीर उद्योगों को मजबूत करता है।
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हस्तशिल्प और टेक्नोलॉजी में उछाल
इल्कल साड़ियों, बिदरीवेयर, और मैसूर रोजवुड इनले पर GST 12% से 5% करने से कारीगरों की आय बढ़ेगी। ये GI-टैग उत्पाद 6-7% सस्ते होंगे, जिससे हथकरघा और हस्तशिल्प की मांग बढ़ेगी। बेंगलुरु, भारत का ड्रोन हब, 5% GST से नवाचार और रोजगार में तेजी देखेगा। ट्रैक्टर, सीमेंट, और मशीनरी पर टैक्स में 6-8% की कमी से ग्रामीण मशीनीकरण और निर्माण कार्यों को बल मिलेगा।
कर्नाटक की आर्थिक उड़ान
ये सुधार कर्नाटक की परंपरा और आधुनिकता को जोड़ते हैं, जिससे कॉफी बागानों से लेकर टेक हब तक समृद्धि का नया दौर शुरू होगा। कम लागत, बढ़ी प्रतिस्पर्धा और मज़बूत MSMEs कर्नाटक को भारत की आर्थिक प्रगति में अग्रणी बनाएंगे।



