नई दिल्ली: 5 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों से पता चला कि देश के 40.8% शहरों में हवा साफ है, 47% में संतोषजनक, लेकिन 12.2% शहरों में स्थिति गंभीर है। उत्तराखंड के काशीपुर में हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही, जहां AQI 203 दर्ज हुआ। यह WHO के सुरक्षित मानक से 1250% ज्यादा है। एक दिन पहले काशीपुर का AQI 38 था, यानी 24 घंटे में प्रदूषण 165 अंक बढ़ा। PM2.5 कणों की अधिकता ने वहां की हवा को जहरीला बना दिया, जिससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
शिलांग की साफ हवा, दिल्ली में भी उछाल
शिलांग में AQI 11 के साथ देश की सबसे साफ हवा रही, जो काशीपुर से 17 गुना बेहतर है। दिल्ली में प्रदूषण बढ़कर AQI 159 पर पहुंचा, जो मध्यम श्रेणी में है। फरीदाबाद का AQI 108 स्थिर रहा। ग्रेटर नोएडा, जो कल AQI 227 के साथ सबसे प्रदूषित था, आज 180 पर आ गया। मंडी गोबिंदगढ़ (AQI 198) और नोएडा (AQI 194) भी शीर्ष प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। हापुड़, भिवाड़ी, गाजियाबाद और गुरुग्राम में PM10 और कुछ शहरों में कार्बन व ओजोन प्रदूषण चिंता का कारण हैं।
साफ हवा वाले शहरों की संख्या घटी
देश के 87 शहरों, जैसे शिलांग, कोलकाता, पुणे, इंदौर, और नागपुर, में AQI 50 से कम रहा, जो साफ हवा का संकेत है। हालांकि, साफ हवा वाले शहरों की संख्या में 18% की कमी आई। संतोषजनक हवा वाले शहर, जैसे मुंबई (AQI 61), लखनऊ (AQI 76), और चेन्नई (AQI 63), 100 तक पहुंच गए। मध्यम श्रेणी के 25 शहरों में दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा शामिल हैं, जहां AQI 101-200 रहा।
प्रदूषण का स्वास्थ्य पर असर
AQI 201-300 खराब, 301-400 बहुत खराब, और 401-500 गंभीर श्रेणी दर्शाता है। काशीपुर जैसे शहरों में खराब हवा स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए। दिल्ली में जनवरी-मार्च 2025 में एक भी दिन साफ हवा नहीं थी और नवंबर-दिसंबर 2024 में कई दिन गंभीर स्तर पर थे। सरकार और नागरिकों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।



