संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का ‘महिला-नेतृत्व विकास’ मॉडल बना वैश्विक प्रेरणा। राजनीतिक सशक्तिकरण से लेकर अंतरराष्ट्रीय शांति सेना में योगदान तक, भारत ने साबित किया कि महिलाओं के बिना स्थायी शांति की कल्पना असंभव है।
एक बदलता वैश्विक परिदृश्य
आज के दौर में जब दुनिया संघर्षों, अस्थिरता और जटिल चुनौतियों से जूझ रही है, भारत ने संयुक्त राष्ट्र के उच्च मंच (UNSC) पर एक ऐसा नज़रिया पेश किया है जो न केवल आशावादी है, बल्कि समाधान-केंद्रित भी है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने हाल ही में ‘महिला, शांति और सुरक्षा’ (WPS) पर आयोजित चर्चा में यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में वैश्विक ‘रोल मॉडल’ बनकर उभरा है।
भारत का ‘महिला-नेतृत्व विकास’ मॉडल
भारत में विकास की परिभाषा बदल गई है। अब हम महिलाओं के विकास की बात नहीं करते, बल्कि ‘महिलाओं के नेतृत्व में विकास’ की बात कर रहे हैं।
- राजनीतिक प्रतिनिधित्व का महायज्ञ: भारत के स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी एक क्रांति की तरह है। संवैधानिक आरक्षण के चलते आज 10 लाख से अधिक महिलाएं ग्राम पंचायतों और स्थानीय निकायों में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। इसके बाद, ‘महिला आरक्षण अधिनियम 2023’ का संसद में पारित होना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह दर्शाता है कि सत्ता के गलियारों में अब आधी आबादी का दबदबा होगा।
- आर्थिक और डिजिटल आत्मनिर्भरता: भारत ने वित्तीय समावेशन, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और कौशल विकास के माध्यम से महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि ‘आर्थिक शक्ति’ बनाया है। आज भारतीय महिलाएं न केवल अपने परिवार को संभाल रही हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के पहिये को भी मजबूती दे रही हैं।
वैश्विक शांति में भारतीय महिलाओं का योगदान
शांति स्थापना (Peacekeeping) की बात हो और भारत का नाम न आए, यह नामुमकिन है। भारतीय महिलाओं ने अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है:
- लाइबेरिया की ऐतिहासिक विरासत: भारत दुनिया का पहला देश बना जिसने संयुक्त राष्ट्र के मिशन के लिए पूरी तरह से महिला यूनिट तैनात की। इस मिशन ने लाइबेरिया की हजारों महिलाओं को पुलिस बल में शामिल होने के लिए प्रेरित किया, जो उस समय एक बड़ी सामाजिक बाधा थी।
- प्रशिक्षण का केंद्र: दिल्ली में स्थित ‘सेंटर फॉर यूनाइटेड नेशंस पीसकीपिंग’ (CUNPK) वैश्विक स्तर पर महिला सैन्य अधिकारियों को तैयार करने का केंद्र बन चुका है। 2016 से लेकर अब तक, भारत ने कई देशों की महिला सैन्य अधिकारियों को प्रशिक्षित किया है, ताकि वे अपने देशों में शांति का संचार कर सकें।
- सम्मान की गौरव गाथा: 2019, 2024 और अब 2026 में मेजर अभिलाषा बराक को मिला ‘यूएन जेंडर एडवोकेट अवॉर्ड’ इस बात का प्रमाण है कि भारतीय महिलाएं केवल युद्धक्षेत्र में ही नहीं, बल्कि शांति दूत के रूप में भी विश्व में सर्वश्रेष्ठ हैं।
निष्कर्ष: शांति का रास्ता ‘नारी शक्ति’ से होकर गुजरता है
राजदूत पर्वथनेनी के शब्दों में— “शांति का रास्ता बिना महिलाओं के नहीं तय किया जा सकता।” यह एक अकाट्य सत्य है कि जिन समाजों में महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता, राजनीतिक आवाज और सामाजिक सम्मान मिलता है, वहां संघर्ष कम होते हैं और समाज का रिकवरी रेट कहीं अधिक तेज होता है।
भारत का यह प्रयास केवल अपने देश के लिए नहीं, बल्कि उन सभी विकासशील देशों के लिए एक मार्गदर्शिका है जो शांति और स्थिरता की तलाश में हैं। भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि महिलाओं का सशक्तिकरण न केवल एक अधिकार है, बल्कि विश्व शांति की सबसे बड़ी आवश्यकता है।



