नई दिल्ली: भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस संजीव खन्ना ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के रवैये पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि लोग इन एजेंसियों को मदद की बजाय परेशान करने वाला मानते हैं, जिसके डर से वे शिकायत करने से कतराते हैं। इसी डर का फायदा साइबर अपराधी उठाते हैं और डिजिटल तरीकों से लोगों को ठगते हैं। जस्टिस खन्ना ने कहा कि लोग डर की वजह से अपराधियों को पैसे दे देते हैं, लेकिन न्याय के लिए आगे नहीं आते। अब समय है कि कानून एजेंसियां लोगों के लिए सहज और मददगार बनें, साथ ही लोगों में जागरूकता भी बढ़े। यह दोतरफा काम ही इस समस्या का हल निकाल सकता है।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस संजीव खन्ना नई दिल्ली के भारत मंडपम में तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम (TPF) द्वारा आयोजित ‘टीपीएफ–दायित्व: नेशनल लीगल कॉन्फ्रेंस ऑन कॉम्बैटिंग व्हाइट कॉलर क्राइम’ में बोल रहे थे। इस कॉन्फ्रेंस में व्हाइट कॉलर क्राइम ‘सफेदपोश अपराध’ जैसे धोखाधड़ी, घोटाले और साइबर फ्रॉड पर चर्चा हुई।
जस्टिस खन्ना ने व्हाइट कॉलर क्राइम को समाज की नैतिकता को नष्ट करने वाला खतरा बताया। उन्होंने कहा कि हर गलती को एक ही नजरिए से नहीं देखना चाहिए। ‘हमें समझना होगा कि कौन सा अपराध जानबूझकर किया गया, कौन सी गलती अनजाने में हुई, और कौन सी सिर्फ प्रक्रिया की चूक थी।’ उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘न्याय व्यवस्था की ताकत सजा की सख्ती में नहीं, बल्कि सही और निश्चित न्याय देने में है।’
उन्होंने कहा कि हर वह काम या चूक, जिसका वित्तीय असर पड़ता है, उसे एक ही नजर से नहीं देखा जा सकता। कानून निर्माताओं को यह फर्क समझना होगा कि कौन-सा कार्य जानबूझकर किया गया धोखा है, कौन सी अनजाने में हुई गलती है, और कौन सी प्रक्रियात्मक चूक।’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘न्याय व्यवस्था की ताकत सजा की कठोरता में नहीं, बल्कि न्याय की सुनिश्चितता में निहित है।’
स्वास्थ्य क्षेत्र में धोखाधड़ी: जीवन से खिलवाड़
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पूर्व क्षेत्रीय निदेशक (दक्षिण-पूर्व एशिया) डॉ. पूनम खेत्रपाल ने स्वास्थ्य क्षेत्र में व्हाइट कॉलर क्राइम पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पैसे की चोरी नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी और विश्वास से जुड़ा अपराध है। जब जानबूझकर खराब इलाज दिया जाता है, गरीबों को इलाज से वंचित किया जाता है, या मुनाफे के लिए सुरक्षा नियम तोड़े जाते हैं, तो यह अपराध है।
डॉ. खेत्रपाल ने बताया कि दुनियाभर में हर साल 86 लाख लोग खराब स्वास्थ्य सेवाओं की वजह से समय से पहले मर जाते हैं, जिनमें भारत में 16 लाख मौतें होती हैं। उन्होंने इसका हल सुझाते हुए कहा कि मजबूत फोरेंसिक ऑडिट, स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है। पैसों के साथ-साथ जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
UPI ने नकद चोरी खत्म कीः आशीष कुमार चौहान
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के सीईओ आशीष कुमार चौहान ने कहा कि जैसे-जैसे समाज तरक्की कर रहा है, अपराध भी सफेदपोश हो रहे हैं। पहले 80 फीसदी अपराध हिंसक थे, लेकिन अब 80 फीसदी वित्तीय या साइबर अपराध हैं। उन्होंने कहा कि यूपीआई ने नकद चोरी खत्म कर दी, लेकिन भ्रष्टाचार अब डिजिटल हो गया है। पैसा अब जेब से नहीं, सिस्टम से चोरी होता है।
हर घोटाला विकास को रोकता हैः राजकुमार नाहटा
टीपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार नाहटा ने कहा कि व्हाइट कॉलर क्राइम कोई छोटा अपराध नहीं है। हर घोटाला हमारा विकास छीनता है और हर धोखाधड़ी देश की प्रगति को धीमा करती है। उन्होंने पेशेवर लोगों से अपील की कि वे नैतिकता के रक्षक बनें और गलत कामों को उजागर करें।
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कॉन्फ्रेंस में 1000 से ज्यादा लोग हुए शामल
इस कॉन्फ्रेंस में कानून, वित्त, चिकित्सा और शिक्षा क्षेत्र के 1000 से ज्यादा पेशेवर शामिल हुए। चर्चा में नैतिकता, नियमों का पालन, शासन और वित्तीय अपराधों से निपटने के नए तरीकों पर बात हुई, जो भारत के विकसित भारत 2047 के सपने से जुड़ा है।



