नई दिल्ली: हाल ही में आई एक आधिकारिक रिपोर्ट ने भारत की कृषि अर्थव्यवस्था और रसद (Logistics) प्रबंधन की एक बड़ी सफलता को रेखांकित किया है। मध्य पूर्व में जारी वैश्विक चुनौतियों और तनाव के बावजूद, भारत ने अपनी उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला को न केवल सुरक्षित रखा है, बल्कि उसे और मजबूत भी किया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (हॉर्मुज स्ट्रेट) को पार करते हुए उर्वरकों से भरे चार जहाजों का भारत की ओर बढ़ना, एक बड़ी राहत और सफलता का संकेत है। इन जहाजों में यूरिया, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और सल्फर लदे हुए हैं। पिछले हफ्ते फारस की खाड़ी के इस महत्वपूर्ण मार्ग को पार करने के बाद, अब ये जहाज भारतीय बंदरगाहों कृष्णपट्टनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा की ओर बढ़ रहे हैं। यह घटनाक्रम भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके माध्यम से देश अपने किसानों के लिए उर्वरकों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है।
उर्वरक बफर का विस्तार और बंदरगाहों पर तैयारी
ग्लोबल ट्रेड की वर्तमान अनिश्चितताओं के बावजूद, इन जहाजों का सुरक्षित आवागमन भारत की लॉजिस्टिक दक्षता को दर्शाता है। बयान में स्पष्ट किया गया है कि इन जहाजों के बंदरगाहों पर पहुंचते ही इनकी अनलोडिंग की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य देश के उर्वरक बफर स्टॉक को बढ़ाना है ताकि खरीफ सीजन के दौरान खेती से जुड़ी किसी भी तरह की जरूरत में कोई कमी न आए।
आंकड़ों पर गौर करें तो 22 जून, 2026 तक भारत का कुल उर्वरक भंडार 196.08 लाख टन के स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले साल के इसी समय के 168.67 लाख टन के मुकाबले काफी उत्साहजनक है और देश की मजबूती को दर्शाता है। इस विशाल बफर स्टॉक की विस्तृत स्थिति कुछ इस प्रकार है:
- यूरिया: 81.44 लाख टन
- डीएपी: 20.92 लाख टन
- एनपीके (NPK): 55.91 लाख टन
- एमओपी (MOP): 12.68 लाख टन
- एसएसपी (SSP): 25.13 लाख टन
खेती की बढ़ती मांग और सरकारी सक्रियता
1 मार्च, 2026 से 21 जून, 2026 तक की अवधि को देखें तो उर्वरकों की खपत में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला है। मध्य पूर्व के संकट के बाद भी खेती की गतिविधियों में तेजी बनी रही है। इस अवधि में कुल उर्वरक बिक्री 153.4 लाख टन तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 140.2 लाख टन की तुलना में 13.2 लाख टन अधिक है। यह वृद्धि भारतीय कृषि क्षेत्र की निरंतर प्रगति का प्रमाण है।
भारतीय किसानों को ग्लोबल मार्केट के अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए सरकार ने दोतरफा दृष्टिकोण अपनाकर सफलता हासिल की है:
- घरेलू उत्पादन में वृद्धि: देश के भीतर उर्वरक बनाने की क्षमता को अधिकतम किया गया, जिसके परिणामस्वरूप संकट के बाद उत्पादन बढ़कर 133.12 लाख टन तक पहुंच गया।
- सुनियोजित आयात: इसी दौरान भारतीय बंदरगाहों पर कुल आयात 43.69 लाख टन दर्ज किया गया।
कूटनीतिक जीत और वैश्विक आयात नेटवर्क
भारत की इस सफलता के पीछे एक बहुत बड़ी कूटनीतिक मेहनत है। सरकार ने अपने हालिया ग्लोबल टेंडर के माध्यम से 17.70 लाख टन यूरिया का कॉन्ट्रैक्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अब तक भारत ने वैश्विक बाजार से 90 लाख टन से अधिक यूरिया और पीएंडके (P&K) उर्वरकों का इंतजाम सुनिश्चित कर लिया है, जो खास तौर पर खरीफ सीजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए है।
यह उपलब्धि दुनिया भर में मौजूद 28 भारतीय मिशनों के सक्रिय कूटनीतिक तालमेल से संभव हो पाई है। इन मिशनों ने विभिन्न इंटरनेशनल कॉरिडोर के जरिए आयात के अलग-अलग और वैकल्पिक रास्ते खोले, जिससे आपूर्ति में कोई बाधा नहीं आई। भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की विविधता इस प्रकार है:
- यूरिया के स्रोत: ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड।
- डीएपी और एनपीके के स्रोत: लाल सागर मार्ग के जरिए रूस, मोरक्को, मिस्र, यूएसए, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब।
निष्कर्ष के तौर पर, यह स्पष्ट है कि सरकार की दूरदर्शी नीतियों, कूटनीतिक सक्रियता और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयासों ने भारत को उर्वरक सुरक्षा के मामले में एक अभेद्य स्थिति में ला खड़ा किया है। आने वाले समय में भी इन प्रयासों से किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित रहेगी और कृषि क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छुएगा।



