नई दिल्ली। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दशकों तक सैन्य ताकत से दूरी बनाए रखने वाला जर्मनी अब अपनी रक्षा नीति में बड़ा बदलाव करता दिख रहा है। अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, जर्मन सरकार यूरोप की सबसे मजबूत सेना बनाने के मिशन पर काम कर रही है और इसके लिए सैन्य खर्च में तेजी से इजाफा किया जा रहा है। रूस से बढ़ते खतरे और डोनाल्ड ट्रम्प के दौर में अमेरिका पर कमजोर होते भरोसे ने जर्मनी को यह अहसास दिलाया है कि अब अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी उसे स्वयं उठानी होगी।
युवाओं को सेना में लाने के लिए बड़ा ऑफर
जर्मनी युवाओं को सेना में शामिल करने के लिए आकर्षक प्रस्ताव दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मन सेना में भर्ती होने पर करीब 2,600 यूरो (लगभग 2.5 लाख रुपये) मासिक वेतन की पेशकश की जा रही है। इसके साथ ही रहने की सुविधा और इलाज पूरी तरह मुफ्त होगा। टैक्स कटने के बाद भी सैनिकों को करीब 2,300 यूरो (लगभग 2 लाख रुपये) हाथ में मिलेंगे।
18 साल के युवाओं को भेजा जा रहा अनिवार्य फॉर्म
इस साल की शुरुआत से जर्मनी में 18 वर्ष के युवाओं को एक अनिवार्य फॉर्म भेजा जा रहा है। इसमें उनसे पूछा जा रहा है कि वे शारीरिक और मानसिक रूप से सेना में सेवा देने के लिए कितने सक्षम हैं। यह प्रक्रिया पिछले महीने पारित हुए नए कानून के बाद शुरू हुई है। हालांकि फिलहाल सेना में भर्ती स्वैच्छिक है, लेकिन यह कानून सरकार को आवश्यकता पड़ने पर अनिवार्य सैन्य सेवा लागू करने का अधिकार भी देता है।
बुंडेसवेयर की ताकत में लगातार इजाफा
बुंडेसवेयर में नवंबर 2025 तक सक्रिय सैनिकों की संख्या 1.84 लाख थी। मई से नवंबर 2025 के बीच इसमें करीब 25 हजार सैनिकों की बढ़ोतरी हुई है। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने संसद में कहा था कि जर्मन सेना को ‘यूरोप की सबसे मजबूत सेना’बनना चाहिए।जर्मनी ने नाटो से वादा किया है कि 2035 तक उसके पास 2.6 लाख सक्रिय सैनिक होंगे। इसके अलावा 2 लाख रिजर्व सैनिक भी तैयार किए जाएंगे। इस तरह कुल सैन्य बल करीब 5 लाख तक पहुंच जाएगा, जो शीत युद्ध के अंत (1990 के दशक की शुरुआत) के समय की सैन्य क्षमता के बराबर होगा।



