नई दिल्ली: आजकल स्मार्टफोन के जरिए पैसा कमाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन क्या आपने सुना है कि फोन कॉल रिकॉर्ड करके भी कमाई हो सकती है? अमेरिका में नियॉन मोबाइल ऐप इस अनोखे कॉन्सेप्ट के साथ तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह ऐप यूजर्स को उनकी कॉल रिकॉर्ड करने के बदले पैसे देता है। प्रति मिनट 30 सेंट तक की कमाई और एक दिन में अधिकतम 30 डॉलर तक कमाने का मौका इस ऐप को आकर्षक बनाता है। इसके अलावा, अगर आप अपने दोस्तों को इस ऐप से जोड़ते हैं, तो रेफरल बोनस भी मिलता है। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे प्राइवेसी से जुड़े कुछ गंभीर सवाल भी छिपे हैं।
कैसे काम करता है नियॉन ऐप?
नियॉन ऐप यूजर्स की कॉल्स को रिकॉर्ड करता है और इस डेटा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कंपनियों को बेचता है। ये कंपनियां इस डेटा का इस्तेमाल मशीन लर्निंग और एआई मॉडल्स को बेहतर बनाने के लिए करती हैं। कंपनी का दावा है कि केवल कॉल करने वाले की आवाज ही रिकॉर्ड की जाती है, लेकिन इसके नियम और शर्तों के अनुसार, नियॉन को इस डेटा को वैश्विक स्तर पर उपयोग करने, बेचने या संशोधित करने का अधिकार है। यानी, आपकी कॉल का डेटा कहीं भी, किसी भी रूप में इस्तेमाल हो सकता है।
प्राइवेसी पर मंडराता खतरा
नियॉन ऐप भले ही तकनीकी रूप से कानूनी हो, क्योंकि यह केवल एक पक्ष की कॉल रिकॉर्ड करता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसका दुरुपयोग संभव है। इस डेटा से नकली कॉल्स या एआई-जनरेटेड फर्जी आवाजें बनाई जा सकती हैं। इसके अलावा, डेटा लीक या गलत हाथों में जाने का जोखिम हमेशा बना रहता है। यूजर्स थोड़े से पैसे के लालच में अपनी और अपने संपर्कों की निजी जानकारी को खतरे में डाल रहे हैं।
क्या है इसका असर?
एआई तकनीक हमारे जीवन को आसान बना रही है, लेकिन यह हमारी निजता को भी प्रभावित कर रही है। नियॉन जैसे ऐप्स दिखाते हैं कि लोग छोटे-मोटे फायदे के लिए अपनी गोपनीयता को दांव पर लगाने को तैयार हैं। लेकिन लंबे समय में यह ट्रेंड व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए, ऐसे ऐप्स का इस्तेमाल करने से पहले उनके नियम-शर्तों को ध्यान से पढ़ना और प्राइवेसी के जोखिमों को समझना जरूरी है।



