नई दिल्ली | देश के डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे को समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए एक ऐतिहासिक पहल की गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस साझेदारी का उद्देश्य आयुष्मान भारत (AB PM-JAY) और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्लेटफार्मों पर AI-संचालित बहुभाषी अनुवाद सेवाएं उपलब्ध कराना है।
AI नवाचार से बदलेगी स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर
ओडिशा सरकार के स्वास्थ्य मंत्री श्री मुकेश महालिंग की उपस्थिति में हस्ताक्षरित इस समझौते के तहत, भाषिनी की एडवांस्ड भाषा प्रौद्योगिकियों जैसे अनुवाद API, स्पीच रिकग्निशन और टेक्स्ट-टू-स्पीच टूल्स को स्वास्थ्य प्रणालियों में एकीकृत किया जाएगा। इससे नागरिकों के लिए अपनी मातृभाषा में स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाना आसान हो जाएगा।
प्रमुख हस्तियों के विचार:
- अमिताभ नाग (CEO, भाषिनी): उन्होंने ‘AI नवाचार और समावेशी भाषा पहुंच’ पर प्रस्तुति देते हुए कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में AI का बहुभाषी और ध्वनि-सक्षम होना अनिवार्य है। उन्होंने जोर दिया कि भाषा कभी भी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में बाधा नहीं बननी चाहिए।
- किरण गोपाल वास्का (संयुक्त सचिव, ABDM): उन्होंने बताया कि वॉइस-टू-टेक्स्ट और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसे टूल्स डॉक्टरों और मरीजों के बीच संवाद को बेहतर बनाएंगे। इससे इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार करने में लगने वाले समय की बचत होगी और डॉक्टरों की दक्षता बढ़ेगी।
क्या होगा इस समझौते का असर?
- मातृभाषा में सेवाएं: लाभार्थी अब अपनी क्षेत्रीय भाषा में स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी ले सकेंगे।
- शिकायत निवारण: भाषा-आधारित AI के माध्यम से शिकायतों का निवारण और भी त्वरित और प्रभावी होगा।
- प्रशासनिक सुगमता: डेटा प्रबंधन और सिस्टम एकीकरण में सुधार होगा, जिससे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी।
- भौगोलिक सीमाओं का अंत: दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी भाषा की चिंता किए बिना डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ पाएंगे।



