बच्चों को शिकार बना रहे साइबर अपराधी, बचा कर रखें

साइबर क्राइम का खतरा बड़ों से ज्यादा बच्चों पर ज्यादा है। एनसीआरबी के आंकड़े इसकी तस्दीक भी करते हैं।

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नई दिल्ली: साइबर अपराधी बुजुर्गों और महिलाओं के साथ-साथ बच्चों को भी ज्यादा शिकार बना रहा है। पांच साल में बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध के मामले सात गुना से ज्यादा बढ़े हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि 2018 में 232 साइबर अपराध के शिकार हुए थे। 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,823 हो गया। 

इस तरह के होते हैं अपराध 

  • साइबर ब्लैकमेलिंग/धमकी/उत्पीड़न
  • नकली प्रोफाइल
  • साइबर पोर्नोग्राफी/ बच्चों को चित्रित करने वाली अश्लील यौन सामग्री की मेजबानी या प्रकाशन
  • साइबर स्टॉकिंग/बदमाशी
  • ऑनलाइन गेम आदि के माध्यम से इंटरनेट अपराध
  • बच्चों के खिलाफ अन्य अपराध
  • बच्चों के खिलाफ कुल साइबर अपराध

सरकार ने उठाए हैं कदम

  • सरकार ने एक पोर्टल बनाया है, ताकि आम जनता विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों में मामलों सहित सभी प्रकार के साइबर अपराधों से सम्बंधित घटनाओं की रिपोर्ट कर दर्ज कर सके। 
  • पोर्टल पर दर्ज साइबर अपराध की घटनाओं, उनकी एफआईआर में रूपांतरण और उसके बाद की कार्रवाई सम्बंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा कानून के प्रावधानों के अनुसार की जाती है। 
  • ऑनलाइन साइबर शिकायत दर्ज करने में सहायता के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ शुरू किया गया है।
  • केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों के बच्चों सहित सभी के बीच साइबर अपराध के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए कई पहल की हैं।
  • इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत सूचना सुरक्षा शिक्षा और जागरूकता (आईएसईए) भी डिजिटल सुरक्षा पर बच्चों की जागरूकता के लिए पूर्वोत्तर राज्यों में इसी तरह के सत्र आयोजित करता है।
  • आई4सी, गृह मंत्रालय ने देश भर में 2 लाख से अधिक एनसीसी, एनएसएस और एनवाईकेएस छात्रों को साइबर स्वच्छता प्रशिक्षण दिया है।
  • आई4सी ने पूर्वोत्तर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के डाकघरों में साइबर जागरूकता संदेशों के प्रचार के लिए डाक विभाग के साथ भी सहयोग किया है।

ऐसे बचाएं बच्चों को

  • माता-पिता को इंटरनेट के खतरों के बारे में शिक्षित करना। बच्चों को ऑनलाइन खतरों, जैसे कि साइबरबुलिंग, ऑनलाइन ग्रूमिंग की जानकारी दें।
  • ऑनलाइन उपयोग के लिए नियम निर्धारित करना। इंटरनेट उपयोग के लिए स्पष्ट नियम और दिशानिर्देश निर्धारित करें। जैसे कि स्क्रीन समय, उपयोग किए जाने वाले ऐप्स, और ऑनलाइन दोस्तों के साथ व्यवहार।
  • माता-पिता के नियंत्रण का उपयोग करें और अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नज़र रखें, लेकिन यह भी सुनिश्चित करें कि वे अपनी गोपनीयता बनाए रखें।
  • बच्चों के साथ ऑनलाइन खतरों के बारे में खुलकर बात करें और उन्हें अपनी चिंताओं और अनुभवों को साझा करने के लिए प्रोत्साहित करें। बच्चों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, जैसे कि नाम, पता, और स्कूल का नाम, ऑनलाइन साझा करने से बचने के बारे में सिखाएं।
  • सोशल मीडिया की निगरानी करनाबच्चों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने के तरीके सिखाना चाहिए। यदि कोई बच्चा ऑनलाइन परेशान या डरा हुआ महसूस करता है, तो उसे तुरंत अपने माता-पिता या किसी विश्वसनीय वयस्क को सूचित करने के लिए प्रोत्साहित करें।

डरा रहे आंकड़े

अपराध प्रमुख 20182019202020212022
साइबर धमकी/उत्पीड़न 4332374
नकली प्रोफाइल 32192
साइबर पोर्नोग्राफी 44103738 969 1171
साइबर स्टॉकिंग4044140123158
इंटरनेट अपराध01002
अन्य अपराध141 153 220 252 416
कुल232 306 1102 1376 1823

स्रोत:  भारत में अपराध

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