नई दिल्ली: भारत इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफेक्चरिंग सेक्टर में तेजी से ग्रोथ कर रहा है। 10 साल में उसने 150 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफेक्चरिंग के साथ तेजी से उभरा है। इससे दुनिया में देश की एक अलग पहचान बनी है। सेमीकंडक्टर, Semiconductor सेक्टर में तो भारत तेजी से लीडर की भूमिका में आ रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भावनगर स्थित इस्कॉन फर्न में आयोजित विकसित भारत संवाद में कहा कि एक समय था जब इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में भारत की कोई पहचान नहीं थी। अब तेजी से उभर रहा है। कार्यक्रम में श्रम एवं रोजगार, युवा कार्यक्रम व खेल मंत्री डॉ. मनसुखभाई मांडविया और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन बंभानिया भी उपस्थित थीं।
331 लाख करोड़ की हुई अपनी अर्थव्यवस्था
रेल मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद जहां वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर में गिरावट देखी गई है। वहीं, भारत की विकास दर में लगातार वृद्धि देखी गई है। 31 मार्च, 2025 तक ₹331 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था के साथ प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है।
कंटेनर बंदरगाह बनेगा
रेल मंत्री ने भावनगर में एक कंटेनर बंदरगाह के विकास की भी घोषणा की जिससे क्षेत्र के विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि हुई। जब सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के माध्यम से भावनगर में एक आईटी पार्क स्थापित करने की मांग उठाई गई तो मंत्री ने तुरंत संबंधित अधिकारी से फोन पर बात की और इस सुविधा को मंजूरी दिलाने के लिए सकारात्मक रुख दिखाया।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक
- 2014-15 में भारत में बेचे गए 26 प्रतिशत मोबाइल फोन का स्थानीय मैन्यूफेक्चरिंग, दिसंबर 2024 तक बढ़कर 99.2 प्रतिशत।
- 2014 में भारत में सिर्फ 2 मोबाइल मैन्यूफेक्चरिंग इकाइयां थीं, आज 300 से अधिक।
- भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2026 तक 300 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंचने के संकेत।
- भारत का मोबाइल फोन निर्यात 2014-15 में 1,566 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 1.2 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो 77 गुना ज्यादा है।
- भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम ने महत्वपूर्ण गति प्राप्त की है, पांच ऐतिहासिक परियोजनाओं को मंजूरी मिली है, जिनका कुल संयुक्त निवेश 1.52 लाख करोड़ रुपये के करीब है।
सरकार उठा रही है कदम
औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सरकार ने पीएलआई योजना के तहत प्रमुख क्षेत्रों के लिए बजट आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि की है। इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए आवंटन 5,747 करोड़ रुपये (2024-25 के लिए संशोधित अनुमान) से बढ़कर 2025-26 में 8,885 करोड़ रुपये हो गया।

फरवरी तक इस योजना के फायदा
- 10,905 करोड़ रुपये का कुल निवेश
- 7,15,823 करोड़ रुपये का कुल उत्पादन
- 3,90,387 करोड़ रुपये का कुल निर्यात
- 1,39,670 अतिरिक्त रोजगार सृजित (प्रत्यक्ष रोजगार)
सेमीकंडक्टर में भारत कहां है
- माइक्रोन के साथ पहले बड़े प्रोजेक्ट को लगभग 22,000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी।
- टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (टीईपीएल) के भारत में 91,526 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर फैब सुविधा स्थापित करने के प्रस्ताव को फरवरी 2024 में मंजूरी दी गई थी। फैब सुविधा पीएसएमसी, ताइवान के साथ प्रौद्योगिकी साझेदारी में स्थापित की जाएगी। पीएसएमसी एक स्थापित सेमीकंडक्टर कंपनी है, जिसकी ताइवान में 6 सेमीकंडक्टर फाउंड्री हैं। परियोजना की उत्पादन क्षमता लगभग 50,000 वेफर स्टार्ट प्रति माह (डब्ल्यूएसपीएम) होगी।
- टीईपीएल के भारत में 27,120 करोड़ रुपये के निवेश के साथ ओएसएटी सुविधा स्थापित करने के प्रस्ताव को फरवरी 2024 में मंजूरी दी गई थी। यह सुविधा 48 मिलियन प्रतिदिन की उत्पादन क्षमता के साथ स्वदेशी सेमीकंडक्टर पैकेजिंग प्रौद्योगिकियों का उपयोग करेगी।
- फरवरी 2024 में सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस लिमिटेड के भारत में 7,584 करोड़ रुपये के निवेश से ओएसएटी सुविधा स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई थी। यह सुविधा रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स अमेरिका इंक, अमेरिका और स्टार्स माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक, थाईलैंड के साथ संयुक्त उद्यम साझेदारी के रूप में स्थापित की जाएगी । इस सुविधा के लिए प्रौद्योगिकी रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन, जापान और स्टार्स माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक, थाईलैंड द्वारा प्रदान की जाएगी। उत्पादन क्षमता लगभग 15.07 मिलियन यूनिट प्रतिदिन होगी।
- वायर बॉन्ड इंटरकनेक्ट, सब्सट्रेट आधारित पैकेज के लिए गुजरात के साणंद में आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (ओएसएटी) सुविधा स्थापित करने के लिए केनेस टेक्नोलॉजी इंडिया लिमिटेड (केटीआईएल) के प्रस्ताव को सितंबर, 2024 में मंजूरी दे दी गई थी। यह तकनीक आईएसओ -टेक्नोलॉजी एसडीएन बीएचडी और एप्टोस टेक्नोलॉजी इंक द्वारा प्रदान की जाएगी। यह सुविधा 3,307 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित की जाएगी। इस सुविधा में प्रतिदिन 6.33 मिलियन से अधिक चिप्स का उत्पादन करने की क्षमता होगी।
पांच साल में करीब लाख करोड़ का सेमीकंडक्टर बाजार होगा
इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) का अनुमान है कि भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 13 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा, 2030 तक 8,95,134 करोड़ रुपये (103.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच जाएगा।
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