नई दिल्ली: भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के प्रमुख अनुसंधान संस्थान, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) ने साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग से पैदा होने वाले सुरक्षा खतरों को देखते हुए, सी-डॉट ने स्वदेशी डीप-टेक कंपनी सिनर्जी क्वांटम इंडिया के साथ एक रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
क्या है यह ‘ऑटोमेटेड टूल’?
इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा स्वचालित उपकरण (Automated Tool) विकसित करना है जो किसी भी डिवाइस या नेटवर्क को स्कैन करके उसमें मौजूद पुराने और असुरक्षित क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिदम की पहचान कर सके। यह टूल न केवल सुरक्षा की कमियों को पकड़ेगा, बल्कि ‘क्वांटम-सुरक्षित’ और ‘क्वांटम-असुरक्षित’ प्रणालियों के बीच स्पष्ट अंतर भी बताएगा।
तीन प्रमुख मॉड्यूल से लैस होगा समाधान
यह स्वदेशी समाधान तीन स्तरों पर काम करेगा:
- वेब एप्लिकेशन: नेटवर्क ट्रैफिक और बाहरी खतरों की निगरानी के लिए।
- सिक्योरिटी स्कैनर एजेंट: डिवाइस के अंदरूनी हिस्सों और लाइब्रेरी की गहराई से जांच के लिए।
- कंट्रोल सॉफ्टवेयर: सभी डेटा को एकीकृत कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए।
आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम
सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने इस मौके पर कहा, “क्वांटम कंप्यूटिंग पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों के लिए चुनौती है। यह सहयोग ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाने की हमारी प्रतिबद्धता है।” वहीं, सिनर्जी क्वांटम के सीईओ जय ओबेराय ने इसे भारत की क्वांटम सुरक्षा यात्रा का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया।
यह तकनीक विशेष रूप से रक्षा, बैंकिंग, दूरसंचार और सरकारी विभागों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी, जिससे उन्हें समय रहते अपनी प्रणालियों को ‘पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी’ पर शिफ्ट करने में मदद मिलेगी।



