नई दिल्ली: भारत की आधी आबादी कृषि से जुड़ी है और यह GDP का 18% देती है। उत्पादकता बढ़ाने के लिए शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण जरूरी है। ICAR (1929 में स्थापित) इसका मुख्य केंद्र है। यह 113 अनुसंधान संस्थान, 74 कृषि विश्वविद्यालय और 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) चलाता है। ICAR हरित क्रांति का नेतृत्व कर चुका है और अब जलवायु अनुकूल फसलें विकसित कर रहा है।
विश्वविद्यालय और संस्थान
देश में 63 राज्य कृषि विश्वविद्यालय (SAUs), 3 केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (CAUs) पूसा (बिहार), इंफाल (मणिपुर), झांसी (UP) और 4 डीम्ड विश्वविद्यालय हैं। पूसा में 8 कॉलेज हैं, जो कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन जैसे कोर्स चलाते हैं। इंफाल 7 उत्तर-पूर्वी राज्यों की सेवा करता है, जहां 2982 छात्र पढ़ रहे हैं। झांसी कृषि इंजीनियरिंग और पशु विज्ञान पर फोकस करता है। प्राइवेट कॉलेज भी बढ़ रहे हैं, जो 5 से 22 हो गए।
नई तकनीक: AI और IoT का इस्तेमाल
सरकार खेती में AI और IoT ला रही है। ड्रोन से छिड़काव, सेंसर से सिंचाई, फसल निगरानी हो रही है। 25 इनोवेशन हब बने, जिनमें 3 कृषि पर हैं। IIT रोपड़ केसर के लिए IoT इस्तेमाल करता है। RKVY से स्टार्टअप को मदद मिल रही है। डिजिटल कृषि प्रोजेक्ट के लिए राज्यों को फंड दिया जा रहा है।
किसानों का कौशल विकास
KVK ने 2021-24 में 58 लाख किसानों को ट्रेनिंग दी, 2024-25 में 18.5 लाख और जुड़े। ATMA ने 1.27 करोड़ किसानों को सिखाया। STRY से 51,000 युवाओं को छोटे कोर्स मिले। SMAM ने 57,000 किसानों को मशीनरी सिखाई। मृदा स्वास्थ्य कार्ड से 25 करोड़ कार्ड बांटे गए। 10,000 FPO किसानों को बाजार से जोड़ रहे हैं।
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विकसित कृषि की दिशा
एक राष्ट्र – एक कृषि – एक टीम के तहत सब मिलकर काम कर रहे हैं। शिक्षा और तकनीक से किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं। यह खेती को टिकाऊ, लाभकारी और आधुनिक बना रहा है।



