नई दिल्ली | भारत को वैश्विक नवाचार का केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0’ (FFS 2.0) की स्थापना को हरी झंडी दे दी है। इस योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये का कोष आवंटित किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप्स के लिए घरेलू वेंचर कैपिटल (Venture Capital) जुटाना और नवाचार को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
डीप-टेक और विनिर्माण पर विशेष ध्यान
एफएफएस 2.0 पिछले चरण की तुलना में अधिक लक्षित और आधुनिक है। इस बार सरकार का विशेष ध्यान गहन तकनीक (Deep Tech), रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक-आधारित नवोन्मेषी विनिर्माण पर है। ये ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें अनुसंधान के लिए ‘धैर्यपूर्ण पूंजी’ (Patient Capital) और दीर्घकालिक निवेश की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, यह फंड प्रारंभिक विकास चरण (Early-stage) के स्टार्टअप्स को धन की कमी से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।
FFS 1.0 की शानदार विरासत
यह नया फंड 2016 में शुरू हुए पहले चरण (FFS 1.0) की जबरदस्त सफलता पर आधारित है।
- पिछला प्रदर्शन: पहले चरण के तहत ₹10,000 करोड़ का निवेश 145 वैकल्पिक निवेश फंडों (AIF) को आवंटित किया गया था।
- प्रभाव: इन फंडों ने 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स में ₹25,500 करोड़ से अधिक की निजी पूंजी जुटाने में मदद की।
- क्षेत्र: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, फिनटेक, स्वास्थ्य सेवा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इसका व्यापक असर दिखा।
विकसित भारत @ 2047 की ओर कदम
स्टार्टअप इंडिया पहल की शुरुआत के बाद से भारत में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 500 से बढ़कर 2 लाख के पार पहुंच गई है। सरकार का लक्ष्य अब इन स्टार्टअप्स को केवल महानगरों तक सीमित न रखकर देश के हर कोने तक पहुँचाना है। एफएफएस 2.0 के माध्यम से घरेलू निवेश परिदृश्य मजबूत होगा, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार सृजित होंगे और वैश्विक स्तर पर ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी।



