पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत का स्ट्राइक रेट सबसे हाई है। वहीं, महागठबंधन में शामिल कांग्रेस फिसड्डी रही। पहली बार बिहार में प्रचार के लिए उतरीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी महिलाओं को प्रभावित नहीं कर पायीं। दूसरी तरफ भाजपा के नेता बृहस्पतिवार से मिठाइयां बांट रहे हैं और अब दूसरे प्रदेशों में भी इसका असर पड़ने की बात कह रहे हैं।
विधानसभा चुनाव 2020 चुनाव में पार्टियों की जीत का स्ट्राइक रेट भाजपा का था। भाजपा ने 110 उम्मीदवार खड़े किये थे, जिसमें 74 को विजय मिली थी। कुल 67 प्रतिशत जीत का स्ट्राइक रेट रहा। दूसरे नंबर पर हम थी, जिसके जीत का स्ट्राइक रेट 57 प्रतिशत था। वीआईपी पार्टी ने कुल 11उम्मीदवारों को खड़ा किया था, जिसके चार उम्मीदवारों को विजय मिली थी। उसके जीत का स्ट्राइक रेट चार था। जदयू के कोटे में 115 सीटें थी और उसके 43 उम्मीदवारों को विजय मिली थी। अर्थात उसके जीत का स्ट्राइक रेट 37 प्रतिशत था।
पिछली बार आरजेडी के जीत का स्ट्राइक रेट था 52 प्रतिशत
दूसरी तरफ महागठबंधन में आरजेडी ने 144 उम्मीदवार खड़े किये थे और 75 सीटों को जीतने में सफल रही। इसके जीत का स्ट्राइक रेट 52 प्रतिशत रहा। लेफ्ट पार्टियों का भी स्ट्राइक रेट अच्छा था। लेफ्ट ने कुल 29 उम्मीदवार खड़े किये थे, जिनमें 16 उम्मीदवारों को जीत मिली। इनकी जीत का स्ट्राइक रेट 55 प्रतिशत था। वहीं, कांग्रेस महागठबंधन में पिछली बार भी फिसड्डी साबित हुई थी। उसने 70 उम्मीवार खड़े किये थे, लेकिन सिर्फ 19 उम्मीदवार ही जीतने में सफल रहे अर्थात इनके जीत का स्ट्राइक रेट मात्र 27 प्रतिशत रहा।
भाजपा सर्वाधिक उत्साहित
इस बार के चुनाव परिणाम एनडीए के लिए सुनामी लहर बनकर आया। इस परिणाम से सबसे ज्यादा उत्साहित भाजपा है। भाजपा ने चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन किया है। भाजपा ने प्रदेश की 243 विधानसभा सीटों में से 101 पर अपने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे, जिनमें से 89 ने जीत दर्ज की है। इस तरह से भाजपा का स्ट्राइक रेट 88 प्रतिशत का रहा है। इसके जीत का स्ट्राइक रेट किसी भी गठबंधन के किसी भी पार्टी से सबसे ज्यादा है। पिछली बार से इसके उम्मीदवारों के जीत का स्ट्राइक रेट 21 प्रतिशत बढ़ गया है।
जेडीयू ने भी किया शानदार प्रदर्शन
एनडीए में खराब प्रदर्शन करने वाली जेडीयू के जीत में भी काफी उछाल आया है और पिछली बार जीत का स्ट्राइक रेट मात्र 37 प्रतिशत तक पहुंचाने वाली जेडीयू के इस बार के जीत का स्ट्राइक रेट 84 प्रतिशत है। इस चुनाव में जेडीयू ने भी भाजपा के बराबर ही 101 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और उसका स्ट्राइक रेट 84 फीसदी का रहा। पार्टी ने इस चुनाव में 85 सीटों पर जीत दर्ज की है।
राजद भी साबित हुई फिसड्डी, पिछली बार 19 सीट जीतने वाली कांग्रेस नहीं पार कर पायी दहाई का अंक
महागठबंधन इस चुनाव में महागठबंधन की ओर से राजद ने सबसे ज्यादा 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी के सिर्फ 25 उम्मीदवार ही जीत दर्ज कर सके। इस तरह से पार्टी का स्ट्राइक रेट बेहद निराशानजक रूप से 17 फीसदी रहा। वहीं, खराब स्ट्राइक रेट के मामले में राजद से बुरा हाल कांग्रेस का रहा है। कांग्रेस ने 61 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सिर्फ उसके 6 उम्मीदवार ही जीत दर्ज कर सके। इस तरह से पार्टी का स्ट्राइक रेट 10 फीसदी रहा। महागठबंधन में वीआईपी ने 15 उम्मीदवार खड़े किये थे, जिसमें कोई भी नहीं जीत सका।
भाकपा माले के 20 उम्मीदवारों में सिर्फ दो उम्मीदवार जीतने में सफल रहे अर्थात इनके जीत का स्ट्राइक रेट 10 फीसदी रहा। सीपीआई ने छह उम्मीदवार खड़े किये थे और एक भी नहीं जीत पाये, जबकि सीपीआईएम ने एक उम्मीदवार खड़े किये और एक को जीताने में सफल रहे। इसके जीत का स्ट्राइक रेट 25 प्रतिशत रहा। वहीं आईआईपी ने तीन उम्मीदवार खड़े किये थे, जिनकी जीत का स्ट्राइक रेट 33 प्रतिशत रहा।
एनडीए के अन्य दलों का भी शानदार प्रदर्शन
एनडीए में दूसरी पार्टियों ने भी जीत का परचम लहराया। चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) भी शामिल है। चिराग की पार्टी ने 29 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 पर जीत दर्ज की। इस तरह से उनकी पार्टी का स्ट्राइक रेट 65 फीसदी दर्ज किया गया। जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तान अवाम मोर्चा का स्ट्राइक रेट भी कमाल का रहा है। मांझी की पार्टी ने 6 सीटों पर चुनाव लड़ा और इनमें से 5 सीटों पर जीत दर्ज की। इस तरह से स्ट्राइक रेट 84 फीसदी रहा। वहीं, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी ने 6 सीटों पर चुनाव लड़ा और 4 में उसे जीत मिली। उनकी पार्टी का स्ट्राइक रेट 67 फीसदी रहा है।



