नई दिल्ली: ब्राजील के साओ पाउलो में स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र (एसवीसीसी) और कोनायुर ने 14 से 15 नवंबर 2025 तक तीसरा अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद सम्मेलन आयोजित किया। यह कार्यक्रम भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के तहत हुआ। सम्मेलन का थीम “आयुर्वेद में विविधता और समावेशिता: हर व्यक्ति और प्राणी की देखभाल” रहा। इसमें भारत और लैटिन अमेरिका के विशेषज्ञ, चिकित्सक, विद्वान और छात्र शामिल हुए।
भारत के राजदूत एच.ई. दिनेश भाटिया ने इसका उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की वैश्विक प्रासंगिकता वैज्ञानिक शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से बढ़ रही है। ब्राजील दक्षिण अमेरिका का पहला देश है जिसने आयुर्वेद को आधिकारिक मान्यता दी। हाल ही में ब्राजील के उप-राष्ट्रपति भी गेराल्डो अल्कमिन की नई दिल्ली यात्रा ने सहयोग को मजबूत किया। राजदूत ने एसवीसीसी और आयुष मंत्रालय की सराहना की।
आयुष सचिव का संदेश
आयुष मंत्रालय के सचिव डॉ. (वैद्य) राजेश कोटेचा ने कहा कि आयुर्वेद समावेशिता, करुणा और शरीर-मन-पर्यावरण के संतुलन का प्रतीक है। उन्होंने भारत-ब्राजील की मजबूत साझेदारी पर जोर दिया। दोनों देशों के स्वास्थ्य मंत्रालयों के बीच समझौता ज्ञापन और जयपुर के राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान व ब्राजील विश्वविद्यालयों के सहयोग को उजागर किया।
डॉ. कोटेचा ने ब्राजील में 40 वर्षों से आयुर्वेद फैलाने वाले शिक्षकों, शोधकर्ताओं और चिकित्सकों की प्रशंसा की। केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव की ओर से यह संदेश दिया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत प्रमाण-आधारित पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग बढ़ाने को प्रतिबद्ध है।
ब्राजील में आयुर्वेद की उपलब्धियां
एसवीसीसी की निदेशक डॉ. ज्योति किरण शुक्ला ने भारत-ब्राजील की साझा वेलनेस परंपराओं पर बात की। आईसीसीआर और एसवीसीसी सांस्कृतिक-अकादमिक सहयोग बढ़ा रहे हैं। साओ पाउलो में भारतीय महावाणिज्य दूत हंसराज सिंह वर्मा ने प्राकृतिक और रोकथाम वाली स्वास्थ्य समाधानों में सहयोग की जरूरत बताई। इस अवसर पर बड़ी खबर यह रही कि आयुर्वेद को ब्राजील की व्यावसायिक वर्गीकरण में शामिल किया गया, जो ऐतिहासिक मान्यता है। सम्मेलन में पूर्वज ज्ञान, विविधता, समावेशिता और ब्राजील में आयुर्वेद विनियमन पर चर्चा हुई।
व्याख्यान और समापन
दो दिवसीय कार्यक्रम में कई व्याख्यान हुए। जैसे- पाउलो बास्तोस गोंकाल्वेस का “दैवव्यापाश्रय: आत्मा की चिकित्सा- गंगा और पश्चिम का पुल”, वैनेसा सैंटेटी का “पृथ्वी से आकाश तक: सूक्ष्म परिवर्तन की यात्रा” और डॉ. रीटा बीट्रिज टोकांटिंस का “आयुर्वेद: चिकित्सा का मार्ग”। अन्य सत्रों में प्लेनरी और सामान्य सभा शामिल थी।समापन में गोलमेज चर्चा “ब्राजील में आयुर्वेद का भविष्य: अगले 40 वर्ष बनाना” हुई। इससे आयुर्वेद की वैश्विक पहुंच मजबूत हुई।
वैश्विक शिखर सम्मेलन की तैयारी
सम्मेलन ने 17-19 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में होने वाले डब्ल्यूएचओ-आयुष मंत्रालय वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन की नींव रखी। यह समग्र स्वास्थ्य और सतत वेलनेस में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाएगा। पारंपरिक प्रणालियां अब वैज्ञानिक रूप ले रही हैं, जो वैश्विक स्वास्थ्य चर्चा को समृद्ध कर रही हैं। यह आयोजन भारत-ब्राजील मित्रता का प्रतीक है। आयुर्वेद अब ब्राजील में पेशेवर स्तर पर मान्य है, जो लाखों लोगों के लिए प्राकृतिक स्वास्थ्य विकल्प खोलेगा।



