नयी दिल्ली। लोकसभा की कार्यवाही के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यदि विपक्ष 50 प्रतिशत क्लॉज के साथ विधेयक पारित करने पर सहमत होता है, तो सरकार कांग्रेस की मांग के अनुरूप आधिकारिक संशोधन लाने को तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस मुद्दे पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है, बशर्ते विपक्ष सहयोग करे।
चर्चा में महिलाओं की रिकॉर्ड भागीदारी
अमित शाह ने बताया कि इस महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक पर कुल 133 सांसदों ने अपनी बात रखी, जिनमें 56 महिला सांसद शामिल थीं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक बताया और कहा कि यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है। गृह मंत्री ने विपक्षी दलों, खासकर इंडी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि कोई भी दल महिलाओं के आरक्षण का खुलकर विरोध नहीं कर रहा, लेकिन ‘अगर-मगर’ के जरिए इसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, यह एक तरह से अप्रत्यक्ष विरोध है।
परिसीमन को लेकर भी घेरा
अमित शाह ने कहा कि जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे दरअसल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए सीटों की संख्या बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परिसीमन से प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित और न्यायसंगत होगा। इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोला। शाह ने कहा कि 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाई थी, लेकिन 1976 में आपातकाल के दौरान 42वें संविधान संशोधन के जरिए परिसीमन पर रोक लगा दी गई। उनके अनुसार, इससे देश की जनता लंबे समय तक उचित प्रतिनिधित्व से वंचित रही।
सरकार का रुख क्या है?
गृह मंत्री ने साफ किया कि सरकार महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लेने की जरूरत है, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके। अमित शाह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। सरकार जहां इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है, वहीं विपक्ष कई शर्तों के साथ अपनी सहमति जता रहा है। ऐसे में 50% क्लॉज पर सहमति इस पूरे मुद्दे की दिशा तय कर सकती है।



