बारामती: उपमुख्यमंत्री अजित पवार और चार अन्य की जान लेने वाले विमान हादसे की तह तक जाने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) ने कमर कस ली है। मंत्रालय ने इस भीषण दुर्घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम का गठन किया है। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की टीमों ने दुर्घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं।
मिल गया ‘ब्लैक बॉक्स’, खुलेगा रहस्य
जांचकर्ताओं के लिए सबसे बड़ी कामयाबी मलबे से ‘ब्लैक बॉक्स’ (कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर) की बरामदगी है।
- क्या होगा फायदा: इससे विमान के अंतिम क्षणों में पायलटों के बीच हुई बातचीत और तकनीकी मापदंडों का विश्लेषण कर हादसे की पूरी क्रेडिबिलिटी के साथ री-कंस्ट्रक्शन किया जा सकेगा।
- पारदर्शिता का वादा: मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध होगी।
जांच के रडार पर ‘दूसरी लैंडिंग’ का प्रयास
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, जांच का मुख्य केंद्र विमान की दूसरी लैंडिंग की कोशिश है।
- पहला प्रयास: सुबह 8:18 बजे विमान ने बारामती एयरफील्ड से संपर्क किया। रनवे-11 पर लैंडिंग की पहली कोशिश के दौरान पायलटों ने कहा कि रनवे दिखाई नहीं दे रहा है, जिसके बाद उन्होंने ‘गो-अराउंड’ (विमान को वापस ऊपर ले जाना) किया।
- हादसा: सुबह 8:43 बजे लैंडिंग की क्लीयरेंस दी गई, लेकिन पायलट की ओर से कोई जवाब नहीं आया। ठीक एक मिनट बाद, सुबह 8:44 बजे रनवे के पास आग की लपटें देखी गईं।
क्या पायलट का फैसला गलत था?
विमानन विशेषज्ञ अब विजिबिलिटी (दृश्यता) और पायलट के निर्णय की समीक्षा कर रहे हैं।
- दृश्यता: डीजीसीए के अनुसार, उस समय विजिबिलिटी लगभग 3,000 मीटर थी और हवाएं शांत थीं।
- ऑपरेटर का पक्ष: विमान का संचालन करने वाली कंपनी ‘VSR वेंचर्स’ के निदेशक विजय कुमार सिंह ने किसी भी तकनीकी खराबी से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि पायलट के पास 16,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव था और विमान पूरी तरह से ‘एयरवर्थी’ (उड़ने योग्य) था।
जांच के प्रमुख बिंदु
| जांच का क्षेत्र | विवरण |
| लॉगबुक और रिकॉर्ड्स | विमान के इंजन, रखरखाव और पायलटों के योग्यता दस्तावेजों की जांच। |
| एटीसी संचार | एयर ट्रैफिक कंट्रोल और पायलट के बीच हुए रेडियो संवाद का विश्लेषण। |
| अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड | क्या फ्लाइंग स्कूल के कर्मियों द्वारा दी गई जानकारी पर्याप्त थी? |
“प्रारंभिक इनपुट खराब दृश्यता की ओर इशारा करते हैं, लेकिन एएआईबी तथ्यों की पुष्टि करेगी। पारदर्शी जांच हमारी प्राथमिकता है।” — राम मोहन नायडू, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री



