नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार, 19 मई को बताया कि उनके मंत्रालय का मकसद देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। करीब 145 करोड़ की आबादी को भरपूर खाद्यान्न मिले, सब्जियां व फल की उपलब्धता भी हों, किसानों की आजीविका ठीक चले, सरकार इसके लिए हर स्तर पर काम कर रही है। मतलब, खेती फायदे का धंधा बने और पोषणयुक्त खाद्यान्न मिले, इस दिशा में काम करना है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए छह सूत्रीय रणनीति है। इसमें उत्पादन बढ़ाना, उत्पादन लागत घटाना, उत्पादन के ठीक दाम देना, प्राकृतिक आपदाओं में नुकसान हो जाएं तो भरपाई करना, कृषि का विविधीकरण के साथ वैल्यू एडिशन और फूड प्रोसेसिंग सरीखी चीजें शामिल है। दूसरी तरफ प्राकृतिक खेती व जैविक खेती को भी बढ़ावा देना है।
खरीफ का रिकॉर्ड उत्पादन
शिवराज सिंह ने बताया कि इस साल खरीफ चावल का उत्पादन 1206.79 लाख मीट्रिक टन, गेहूं 1154.30 लाख मीट्रिक टन, खरीफ मक्का 248.11 लाख मीट्रिक टन, मूंगफली 104.26 लाख मीट्रिक टन और सोयाबीन 151.32 लाख मीट्रिक टन हुआ है। अब तक का यह रिकॉर्ड उत्पादन है।
केंद्रीय कृषि मंत्री के मुताबिक, हमारा उत्पादन बढ़ रहा है, इसलिए अन्न के भंडार भरे हैं। लेकिन हम यहां रुकना नहीं चाहते। हम अपने देश की जरूरत पूरी करेंगे और दूसरे देशों को भी मदद करेंगे। हमारा सपना और संकल्प एक दिन भारत को फूड बास्केट ऑफ वर्ल्ड बनाना है। इसलिए हम लोगों ने तय किया है कि खरीफ फसल के लिए हम सारे संस्थानों को एक साथ लाकर एक दिशा में ले जाएं।
आईसीएआर करेगा अभियान का समन्वय
शिवराज सिंह ने बताया कि अब आईसीएआर के 113 संस्थान हैं। अभियान के माध्यम से इनमें तालमेल बेहतर होगा। राज्य सरकार अपने प्रयत्न करती है। केंद्र सरकार की अपनी योजनाएं है। यूनिवर्सिटी अपना काम करती है। सरकार ने तय किया कि इन सभी को जोड़कर एक दिशा ले जाया जाए।
रबी और खरीफ का उत्पादन बढ़ा
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 2023-24 में कुल खाद्यान्न उत्पादन में खरीफ का हिस्सा 1557.68 लाख टन था। 2024-25 में यह 1663.91 लाख टन हो गया। वहीं, रबी का उत्पादन 2023-24 में 1600.06 लाख टन से बढ़कर 1645.27 लाख टन हो गया है। स्पष्ट है कि खाद्यान उत्पादन में तेजी से इजाफा हुआ है। इसमें अगर दालें भी जोड़ दी जाएं तो दालों का कुल उत्पादन 221.71 से बढ़कर 230.22 लाख टन हो गया। जबकि तिलहनी फसलें 384 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 416 लाख मीट्रिक टन हो गई हैं।
चलेगा विकसित कृषि संकल्प अभियान
कृषि मंत्री के मुताबिक, अभी करीब 16 हजार वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं। अब इनको मांग आधारित रिसर्च करनी है। अभियान की जो रूपरेखा बनाई गई है, उसमें वैज्ञानिकों की 2170 टीमें होंगी। हर टीम में न्यूनतम 4 वैज्ञानिक काम करेंगे। इनके साथ एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों को भी जोड़ा जाएगा। यूनिवर्सिटी, कॉलेज, राज्य सरकार का अमला, केंद्र की कृषि विभाग की टीम, प्रगतिशील किसान, FPO’s ये सब मिलकर टीम के रूप में जिलों में जाएंगे। आगे यह गांवों में पहुंचकर किसानों से 29 मई से 12 जून तक हर रोज सुबह-शाम व दोपहर संवाद करेंगे।
इन चीजों पर होगी बात
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जिस जगह पर टीम जाएंगी, वहां की एग्रो क्लाइमेटिक कंडीशन क्या है, वहां मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्व हैं, किन की कमी है, पानी कितना है, वर्षा कितनी होती है, जलवायु कैसी है, मिट्टी की गुणवत्ता व हेल्थ कार्ड बना है, लेकिन यदि किसान उसका उपयोग नहीं कर रहे तो हेल्थ कार्ड में जो मिट्टी में तत्व हैं, जिनकी कमी है उसके आधार पर यहां कौन-से बीज किस फसल के अच्छे रहेंगे, कौन-सी फसल ठीक होगी, यह सब कुछ किसानों को बताया जाएगा। इसके साथ ही किस तरीके से बोवनी की जाए, कौन-सी खाद कितनी मात्रा में डाला जाए, इसकी भी जानकारी दी जाएगी।
लैब से खेतों तक पहुंचे शोध
शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा कहते हैं लैब टू लैंड यानि लैब से खेतों तक शोध पहुंचे। पीएम ने जय अनुसंधान का नारा दिया है। लैब और विज्ञान किसानों के द्वार जायेगा। इससे हम कृषि के उत्पादन को बढ़ायेंगे और लागत को भी घटायेंगे। इससे कृषि शोध की दिशा भी तय करेंगे। यह एक रचनात्मक अभियान है। वैज्ञानिक ग्यारह महीने लैब में और एक महीने किसानों के पास जाकर कार्य करेंगे। खरीफ और रबी दोनों फसलों की बुआई से पहले प्रत्येक वर्ष यह अभियान चलेगा।



