नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में मिलावटी दूध की एक भयावह घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, जहरीला दूध पीने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन मरीजों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। इस घटना में बच्चे और बुजुर्ग भी प्रभावित हुए हैं, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।
उल्टी, पेट दर्द और किडनी फेलियर जैसे लक्षण
लालाचेरुवु, चौदेस्वरनगर और स्वरूपनगर इलाकों में फरवरी से ही लोग बीमार पड़ने लगे थे। दूध पीने के कुछ ही घंटों के भीतर लोगों में उल्टी, तेज पेट दर्द, पेशाब बंद होना और गंभीर किडनी फेलियर जैसे लक्षण सामने आए। शुरुआत में 22 फरवरी को कुछ मामले सामने आए, लेकिन धीरे-धीरे बीमारों की संख्या बढ़ती गई। 20 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जिनमें कई की हालत गंभीर हो गई।
जहरीले केमिकल से दूषित था दूध
स्वास्थ्य विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि दूध में एथिलीन ग्लाइकॉल नामक जहरीला पदार्थ मिलाया गया था। यह केमिकल आमतौर पर एंटी-फ्रीज में इस्तेमाल होता है और मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पदार्थ किडनी और अन्य अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। कई मरीजों में ब्लड यूरिया और सीरम क्रिएटिनिन का स्तर असामान्य रूप से बढ़ा पाया गया, जिससे किडनी फेलियर की स्थिति उत्पन्न हुई। जानकारी के मुताबिक, नरसापुरम गांव की एक स्थानीय डेयरी यूनिट से यह दूध 100 से अधिक परिवारों को सप्लाई किया गया था। दूध पीने के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें डायलिसिस व वेंटिलेटर सपोर्ट तक की जरूरत पड़ी। घटना सामने आने के बाद संबंधित डेयरी की सप्लाई तुरंत बंद कर दी गई और प्रभावित इलाकों में घर-घर जाकर सर्वे शुरू किया गया।
जांच में प्रशासन सख्त, आरोपी गिरफ्तार
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संदिग्ध दूध विक्रेता को गिरफ्तार कर लिया है। फूड सेफ्टी विभाग ने दूध, दही, घी और पानी के सैंपल लिए। एनिमल हसबेंडरी विभाग ने पशु चारे और पानी की जांच की। पुलिस ने अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर लिया है। हैदराबाद से वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी इलाज की निगरानी कर रहे हैं, जबकि रैपिड रिस्पांस टीमों को क्षेत्र में तैनात किया गया है।
खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हालांकि प्रशासन का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन प्रभावित परिवारों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। यह घटना खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाला दूध ही जब जहर बन जाए, तो निगरानी तंत्र की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। विशेषज्ञों का मानना है कि मिलावट रोकने के लिए सख्त जांच, नियमित निरीक्षण और कठोर कार्रवाई बेहद जरूरी है। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है, ताकि मिलावट के पीछे का पूरा नेटवर्क और जिम्मेदार लोग सामने आ सकें।



