IITF 2025 में परंपरा और महत्वाकांक्षा का अनोखा मेल

44वें भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले (IITF 2025) में देश-विदेश के हजारों युवा कारीगर और उद्यमी अपनी पारंपरिक कला को नई तकनीक और बाजार से जोड़कर नया इतिहास लिख रहे हैं। सरकार की योजनाएं और मेरा युवा भारत (MY Bharat) जैसे मंच उन्हें पहली बार इतना बड़ा मौका दे रहे हैं।

Share This Article:

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के 26 साल के नमन शर्मा गुड़ बनाने की पुरानी परंपरा को आधुनिक बना रहे हैं। रासायनिक मुक्त, शुद्ध गुड़ बनाने वाली उनकी कंपनी में भाई-बहन के साथ 40 लोग काम करते हैं। पहली बार IITF में आए नमन अब विदेशों में गुड़ भेजने का सपना देख रहे हैं।

पद्मश्री दादी की विरासत संभाल रहा 18 साल का मधुरम

बिहार के मधुबनी चित्रकला गांव जितवारपुर के 18 साल के मधुरम कुमार झा पद्मश्री बुआ देवी के पोते हैं। बचपन से दादी के साथ बैठकर उन्होंने यह कला सीखी। मेले के बाद 12वीं की परीक्षा देने वाले मधुरम का सपना है कि मधुबनी पेंटिंग दुनिया के हर कोने तक पहुंचे और वे IRS अधिकारी या नौसेना में जाएं।

मिट्टी की कला को जीवंत रख रही करिश्मा

राजस्थान के दौसा जिले की 20 साल की करिश्मा परजापत कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की सैकड़ों साल पुरानी मिट्टी के बर्तन बनाने की कला में हाथ बंटा रही हैं। महिला सशक्तीकरण निदेशालय के सहयोग से दूसरी बार मेले में आए उनके परिवार के स्टॉल पर लोग टेराकोटा के सामान खूब पसंद कर रहे हैं।

800 साल पुरानी घंटियां अब भी गूंज रही हैं

गुजरात के कच्छ से आए 26 साल के लुहार जावेद अब्दुल्ला तांबे की घंटियां बनाते हैं। यह कला उनके परिवार में 400 साल से चल रही है। पहले गाय-भैंस के गले में बांधी जाती थीं, अब ये विंड चाइम और सजावटी सामान बन गई हैं। अमेरिका तक पहुंच चुकी इन घंटियों को जावेद अब दिल्ली वालों को बजा रहे हैं।

तूनिशिया से दिल्ली तक- विदेशी युवा भी शामिल

अंतरराष्ट्रीय मंडप में तूनिशिया के 26 साल के अहमद शाहिद हाथ से बने मिट्टी के बर्तन और जैतून की लकड़ी के सामान बेच रहे हैं। वे कहते हैं, यहां लोग बहुत पूछते हैं कि हम चीजें कैसे बनाते हैं। उनके लिए IITF भारत के बाजार को समझने और नए व्यापारिक रिश्ते बनाने का बड़ा मौका है।

युवा ही हैं असली ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’

इस बार के व्यापार मेले में सबसे खूबसूरत तस्वीर यही है कि अलग-अलग राज्यों और विदेशों से आए युवा अपनी कला, अपने उत्पाद और अपने सपनों को एक मंच पर लेकर आए हैं। सरकार की एमएसएमई योजनाएं, कौशल विकास कार्यक्रम और मेरा युवा भारत जैसे मंच उन्हें सिर्फ स्टॉल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और नया बाजार दे रहे हैं। ये युवा बता रहे हैं कि परंपरा और आधुनिकता में कोई टकराव नहीं है। दोनों को साथ लेकर ही भारत आगे बढ़ेगा। 

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.