नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के 26 साल के नमन शर्मा गुड़ बनाने की पुरानी परंपरा को आधुनिक बना रहे हैं। रासायनिक मुक्त, शुद्ध गुड़ बनाने वाली उनकी कंपनी में भाई-बहन के साथ 40 लोग काम करते हैं। पहली बार IITF में आए नमन अब विदेशों में गुड़ भेजने का सपना देख रहे हैं।
पद्मश्री दादी की विरासत संभाल रहा 18 साल का मधुरम
बिहार के मधुबनी चित्रकला गांव जितवारपुर के 18 साल के मधुरम कुमार झा पद्मश्री बुआ देवी के पोते हैं। बचपन से दादी के साथ बैठकर उन्होंने यह कला सीखी। मेले के बाद 12वीं की परीक्षा देने वाले मधुरम का सपना है कि मधुबनी पेंटिंग दुनिया के हर कोने तक पहुंचे और वे IRS अधिकारी या नौसेना में जाएं।
मिट्टी की कला को जीवंत रख रही करिश्मा
राजस्थान के दौसा जिले की 20 साल की करिश्मा परजापत कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की सैकड़ों साल पुरानी मिट्टी के बर्तन बनाने की कला में हाथ बंटा रही हैं। महिला सशक्तीकरण निदेशालय के सहयोग से दूसरी बार मेले में आए उनके परिवार के स्टॉल पर लोग टेराकोटा के सामान खूब पसंद कर रहे हैं।
800 साल पुरानी घंटियां अब भी गूंज रही हैं
गुजरात के कच्छ से आए 26 साल के लुहार जावेद अब्दुल्ला तांबे की घंटियां बनाते हैं। यह कला उनके परिवार में 400 साल से चल रही है। पहले गाय-भैंस के गले में बांधी जाती थीं, अब ये विंड चाइम और सजावटी सामान बन गई हैं। अमेरिका तक पहुंच चुकी इन घंटियों को जावेद अब दिल्ली वालों को बजा रहे हैं।
तूनिशिया से दिल्ली तक- विदेशी युवा भी शामिल
अंतरराष्ट्रीय मंडप में तूनिशिया के 26 साल के अहमद शाहिद हाथ से बने मिट्टी के बर्तन और जैतून की लकड़ी के सामान बेच रहे हैं। वे कहते हैं, यहां लोग बहुत पूछते हैं कि हम चीजें कैसे बनाते हैं। उनके लिए IITF भारत के बाजार को समझने और नए व्यापारिक रिश्ते बनाने का बड़ा मौका है।
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युवा ही हैं असली ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’
इस बार के व्यापार मेले में सबसे खूबसूरत तस्वीर यही है कि अलग-अलग राज्यों और विदेशों से आए युवा अपनी कला, अपने उत्पाद और अपने सपनों को एक मंच पर लेकर आए हैं। सरकार की एमएसएमई योजनाएं, कौशल विकास कार्यक्रम और मेरा युवा भारत जैसे मंच उन्हें सिर्फ स्टॉल नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और नया बाजार दे रहे हैं। ये युवा बता रहे हैं कि परंपरा और आधुनिकता में कोई टकराव नहीं है। दोनों को साथ लेकर ही भारत आगे बढ़ेगा।



