मुंबई (महाराष्ट्र) | आज के तीव्र गति से बदलते वैश्वीकरण के इस दौर में, जहाँ बाज़ारों में हर दिन हजारों नए उत्पाद उतारे जा रहे हैं, उपभोक्ताओं के लिए यह सुनिश्चित करना बेहद मुश्किल हो जाता है कि कौन सा उत्पाद उनके लिए पूरी तरह से सुरक्षित और विश्वसनीय है। एक मजबूत अर्थव्यवस्था की नींव केवल उत्पादन पर नहीं, बल्कि उत्पादित वस्तुओं की ‘गुणवत्ता’ पर टिकी होती है। इसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, शुक्रवार को केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मुंबई स्थित राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र (NTH – National Test House) के परिसर का दौरा किया और परीक्षण सुविधाओं के व्यापक विस्तार की आधारशिला रखी।
यह आयोजन केवल एक बुनियादी ढांचे के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अब वैश्विक गुणवत्ता मानकों (Global Quality Standards) से समझौता करने के मूड में नहीं है। देश अब अपने उपभोक्ताओं की सुरक्षा और अपने उद्योगों के विकास को एक ही तराजू पर तौलते हुए आगे बढ़ रहा है।
उपभोक्ता हितों की रक्षा और विश्वसनीयता की आवश्यकता
किसी भी स्वस्थ बाजार व्यवस्था में उपभोक्ता राजा होता है। मंत्री प्रल्हाद जोशी ने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से इस बात पर जोर दिया कि “उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा, उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ाने और व्यापार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूत परीक्षण और प्रमाणन अवसंरचना अत्यंत आवश्यक है।”
जब भी हम बाजार से कोई सामान खरीदते हैं—चाहे वह बिजली का उपकरण हो, खाने-पीने की चीजें हों, या निर्माण सामग्री—हम एक भरोसे के साथ उसे खरीदते हैं। यह भरोसा हवा में नहीं बनता; इसके पीछे एक सशक्त गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली (Quality Assurance System) काम करती है। यदि देश में परीक्षण प्रयोगशालाएं उन्नत और आधुनिक होंगी, तो खराब या मिलावटी उत्पादों को बाजार में आने से पहले ही रोका जा सकेगा। इससे न केवल आम जनता के स्वास्थ्य और धन की रक्षा होती है, बल्कि बाजार में एक सकारात्मक माहौल भी बनता है।
व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को प्रोत्साहन
लंबे समय तक, भारतीय उद्योगों—विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs)—को अपने उत्पादों के परीक्षण और प्रमाणन के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती थी। कभी-कभी उन्हें अपने नमूने विदेशों में या देश के चुनिंदा निजी महंगे लैब में भेजने पड़ते थे, जिससे न केवल समय की बर्बादी होती थी बल्कि लागत भी बढ़ती थी।
एनटीएच (NTH) की सुविधाओं के विस्तार से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में सीधा उछाल आएगा। उद्योगपतियों और निर्माताओं को अब अपने ही देश और राज्य में विश्व स्तरीय परीक्षण सुविधाएं मिल सकेंगी। जब प्रमाणन की प्रक्रिया तेज और सुलभ हो जाती है, तो नए उत्पादों को बाजार में उतारने का समय (Go-to-market time) कम हो जाता है।
आत्मनिर्भर भारत: एक मजबूत स्तंभ
‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना केवल तब साकार हो सकता है जब हमारे देश में बने उत्पाद न केवल भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी गुणवत्ता का डंका बजाएं। प्रल्हाद जोशी ने इस बात को रेखांकित करते हुए कहा कि, “विश्व स्तरीय परीक्षण अवसंरचना सरकार के आत्मनिर्भर भारत विजन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।”
भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता (Global Competitiveness) तभी बढ़ेगी जब वे अंतरराष्ट्रीय मानकों (International Standards) पर खरे उतरेंगे। पश्चिमी देशों और अन्य विकसित बाजारों में निर्यात के लिए कड़े गुणवत्ता मानक होते हैं। यदि हमारी घरेलू प्रयोगशालाएं उन मानकों के अनुसार परीक्षण (Testing) कर सकेंगी, तो ‘मेड इन इंडिया’ (Make in India) का ठप्पा वैश्विक स्तर पर विश्वसनीयता का प्रतीक बन जाएगा।
मुंबई एनटीएच परिसर: भूमि पूजन और विस्तार की आधारशिला
शुक्रवार को हुए इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की शुरुआत भूमि पूजन समारोह के साथ हुई। मंत्री महोदय ने पूरे विधि-विधान से परीक्षण सुविधाओं के भावी विस्तार के लिए आधारशिला रखी। यह विस्तार देश के गुणवत्ता आश्वासन और परीक्षण अवसंरचना के इतिहास में एक मील का पत्थर है।
मुंबई, जो भारत की आर्थिक राजधानी है, वहां ऐसे उन्नत केंद्र का होना पूरे पश्चिमी और दक्षिणी भारत के उद्योगों के लिए एक वरदान है। मंत्री ने उपभोक्ता मामलों के विभाग और राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र द्वारा देशभर में उन्नत परीक्षण क्षमताओं के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण परीक्षण सेवाओं को उद्योगों और आम लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाने के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
उन्होंने मुंबई स्थित मौजूदा प्रयोगशालाओं का भी विस्तृत दौरा किया। इस दौरान उन्होंने चल रही आधुनिकीकरण पहलों का जायजा लिया और परीक्षण क्षमताओं की वर्तमान स्थिति व भविष्य की योजनाओं की समीक्षा के लिए वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गहन बातचीत की।
नई प्रयोगशालाओं और केंद्रों का उद्घाटन: एक नई शुरुआत
इस कार्यक्रम का सबसे अहम हिस्सा नई प्रयोगशालाओं का उद्घाटन था, जो विभिन्न क्षेत्रों में भारत की परीक्षण क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा। इस दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुविधाओं का शुभारंभ किया गया:
- मुंबई में सूक्ष्मजीवविज्ञानी (Microbiological) परीक्षण प्रयोगशाला का उद्घाटन: सूक्ष्मजीव विज्ञान या माइक्रोबायोलॉजी परीक्षण आज के समय में, विशेषकर कोविड-19 महामारी के बाद, अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गया है। खाद्य पदार्थों, फार्मास्यूटिकल्स, सौंदर्य प्रसाधनों और कृषि उत्पादों में हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस या फंगस की जांच के लिए यह लैब मील का पत्थर साबित होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जो उत्पाद सीधे मानव शरीर के संपर्क में आते हैं, वे शत-प्रतिशत सुरक्षित हों।
- गाजियाबाद स्थित एनटीएच के उत्तरी क्षेत्र केंद्र का वर्चुअल उद्घाटन: उत्तर भारत के एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र, गाजियाबाद में राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र के उत्तरी क्षेत्र केंद्र की शुरुआत एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह केंद्र दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के विशाल औद्योगिक बेल्ट को अपनी सेवाएं देगा। इससे उत्तर भारत के निर्माताओं को अपने उत्पादों की टेस्टिंग के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे लॉजिस्टिक लागत में भारी कमी आएगी।
- छत्रपति संभाजीनगर में एनटीएच-ऑरिक (AURIC) उपग्रह केंद्र का शुभारंभ: महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) की ऑरिक सिटी (AURIC City – Aurangabad Industrial City) में स्थापित एनटीएच-ऑरिक उपग्रह केंद्र का भी वर्चुअल उद्घाटन किया गया। ऑरिक सिटी भारत के सबसे महत्वाकांक्षी स्मार्ट इंडस्ट्रियल शहरों में से एक है। वहां सीधे एक परीक्षण केंद्र (Satellite Center) की स्थापना का अर्थ है कि उस पूरे औद्योगिक गलियारे में स्थित कंपनियों को उनके दरवाजे पर ही विश्व स्तरीय टेस्टिंग सुविधाएं मिलेंगी।
भविष्य पर प्रभाव: परीक्षण क्षमता और उपभोक्ता सुरक्षा में वृद्धि
इन सभी नई सुविधाओं के शुरू होने से कई प्रमुख क्षेत्रों में परीक्षण क्षमता (Testing Capacity) में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके कुछ मुख्य लाभ इस प्रकार होंगे:
- अनुपालन (Compliance) में मजबूती: उद्योग अब राष्ट्रीय (BIS, FSSAI आदि) और अंतरराष्ट्रीय (ISO, CE आदि) मानकों का अधिक सहजता से अनुपालन कर सकेंगे।
- उपभोक्ता सुरक्षा (Consumer Safety): बाजार में आने वाले उत्पादों की कड़ी वैज्ञानिक जांच होने से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े जोखिम न्यूनतम हो जाएंगे।
- औद्योगिक प्रतिस्पर्धा (Industrial Competitiveness): जब उत्पादों की गुणवत्ता उच्च स्तर की होगी, तो भारतीय निर्माता वैश्विक मंच पर चीन और अन्य विकसित देशों के उत्पादों के साथ मजबूती से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
- रोजगार सृजन (Job Creation): इन प्रयोगशालाओं के विस्तार से देश में उच्च-कुशल वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, और तकनीकी कर्मचारियों के लिए नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र (NTH) में किया जा रहा यह आधुनिकीकरण और विस्तार महज ईंट-पत्थर और मशीनों का विस्तार नहीं है; यह ‘नये भारत’ की उस सोच का प्रतीक है जो गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करना चाहती। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी द्वारा उठाया गया यह कदम स्पष्ट करता है कि सरकार की नीतियां अब केवल उत्पादन बढ़ाने पर केंद्रित नहीं हैं, बल्कि ‘गुणवत्तापूर्ण उत्पादन’ उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
गाजियाबाद से लेकर मुंबई और संभाजीनगर तक फैली ये नई प्रयोगशालाएं इस बात की गवाह बनेंगी कि भारत का बुनियादी ढांचा अब भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है। यह सुनिश्चित करेगा कि जब कोई उपभोक्ता किसी उत्पाद पर ‘मेड इन इंडिया’ का टैग देखे, तो उसके मन में सुरक्षा, विश्वसनीयता और अटूट विश्वास की भावना पैदा हो।



