नई दिल्ली | दिल्ली सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने केजरीवाल द्वारा हाल ही में किए गए भावनात्मक व्यवहार को ‘ओवरएक्टिंग’ और ‘नौटंकी’ करार देते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने दिल्ली की जनता को 11 साल तक खून के आंसू रुलाए, वह आज खुद रोने का ढोंग कर रहा है। मिश्रा ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत के एक आदेश पर जश्न मनाना बेमानी है क्योंकि मामला अभी उच्च न्यायालय में लंबित है और केजरीवाल अभी अपने भ्रष्टाचार के पापों से मुक्त नहीं हुए हैं।

शराब घोटाले का जिक्र करते हुए कपिल मिश्रा ने कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि यदि शराब नीति ईमानदारी पर आधारित थी, तो जांच की आहट मिलते ही उसे वापस क्यों लिया गया? उन्होंने केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर सबूत मिटाने के उद्देश्य से सैकड़ों मोबाइल फोन तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि यह सब ऑन रिकॉर्ड है।
मंत्री ने सीएजी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दिल्ली सरकार को हुए भारी राजस्व नुकसान और थोक व्यापारियों का कमीशन 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने के पीछे की मंशा पर भी प्रश्न उठाए।
मिश्रा ने केजरीवाल सरकार के कार्यकाल के दौरान दिल्ली की बदहाल स्थिति पर निशाना साधते हुए कहा कि सड़कों, पानी, सीवर, यमुना और वायु प्रदूषण की स्थिति भ्रष्टाचार का जीता-जागता प्रतीक है। उन्होंने मोहल्ला क्लीनिकों और अस्पतालों की दुर्दशा का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली की माताओं-बहनों ने शराब की ‘एक के साथ एक फ्री’ नीति के कारण अपने परिवारों को बर्बाद होते देखा है। उनके अनुसार, दिल्ली की जनता ने पिछले चुनावों में केजरीवाल और उनके मंत्रियों को हराकर पहले ही अपना न्याय सुना दिया है।
अंत में, कपिल मिश्रा ने पंजाब के राजनीतिक भविष्य की ओर संकेत करते हुए कहा कि जनता की आवाज़ ईश्वर की आवाज होती है। उन्होंने दावा किया कि जिस प्रकार दिल्ली की जनता ने केजरीवाल के भ्रष्टाचार और कुशासन को नकार दिया है, वही हश्र पंजाब में भी होने वाला है।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अभी कानूनी लड़ाई जारी है और पीड़ितों की आह अभी बाकी है, इसलिए केजरीवाल को इतनी जल्दी अपनी ईमानदारी का ‘नकली मेडल’ लेकर नहीं घूमना चाहिए।



